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मुद्दों के आधार पर कहानी लेखन कीजिए: एक हंस और एक कौए में मित्रता - हंस का कौए के साथ उड़ते जाना - कौए का दधिपात्र लेकर जाने वाले ग्वाले को देखना - ललचाना - कौए का दही खाने का आग्रह - - Hindi - Composite [हिंदी - संयुक्त]

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Question

मुद्दों के आधार पर कहानी लेखन कीजिए:

एक हंस और एक कौए में मित्रता - हंस का कौए के साथ उड़ते जाना - कौए का दधिपात्र लेकर जाने वाले ग्वाले को देखना - ललचाना - कौए का दही खाने का आग्रह - हंस का इनकार - कौए का घसीटकर ले जाना - कौए का चोंच नचा - नचाकर दही खाना - हंस का बिलकुल न खाना - आहट पाकर कौए का उड़ जाना - हंस का पकड़ा जाना - परिणाम - शीर्षक।

Answer in Brief

Solution

दोस्ती का परीक्षण: हंस और कौआ की कहानी

बहुत समय पहले की बात है, एक छोटे से गाँव में एक हंस और एक कौआ बहुत अच्छे दोस्त थे। यह दोनों सुबह से शाम तक साथ में उड़ते रहते थे। इनकी मित्रता कुछ खास थी, जिससे कि हंस कभी भी उदास नहीं होता था और कौआ भी कभी अपनी मित्रता से गरीब नहीं महसूस करता था। एक दिन, हंस ने कौए को अपने साथ उड़ने का आमंत्रण दिया। कौए ने खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया। एक दिन, जब हंस और कौआ उड़ रहे थे, वे एक ग्वाले को देखा जिसके हाथ में एक बड़ा सा दधिपात्र था। कौआ ने हंस से कहा, "देख, वह ग्वाला दही लेकर जा रहा है। हमें भी दही खाना चाहिए।" हंस ने दधिपात्र की ओर देखा और उसमें स्वादिष्ट दही की खुशबू महसूस की। कौआ ने उससे दही खाने का प्रस्ताव दिया। हंस ने हँसते हुए कहा, "मेरे दोस्त, मैं दही नहीं खा सकता। मैं सिर्फ जल का ही सेवन करता हूँ।" कौआ ने ललचाकर कहा, "तू एक बार खा ले, बहुत स्वादिष्ट है।" हंस ने इनकार किया, लेकिन कौआ ने उसे घसीट कर दधिपात्र छीन लिया। कौआ ने चोंच से दही निकाली और खुशी-खुशी खा ली। इसके बाद, कौआ ने अपने चोंच से नाचते हुए कहा, "हंस, यह दही कितनी स्वादिष्ट थी, तूने क्यों नहीं खाई?" हंस ने मुस्कराते हुए उत्तर दिया, "मेरा सवाद तो सिर्फ जल का है, और मैं सचमुच सुखी हूँ जल में ही।" इसके बाद, एक हंस का कौआ के साथ दोस्ती में अद्वितीयता बनी रही, और हंस ने कौआ के साथ उदारता और समझदारी का प्रदर्शन किया।

परिणाम - दोस्ती में समझदारी और उदारता बहुत महत्वपूर्ण होती हैं, और हमें दूसरों की पसंद और अनुसरण को समझना चाहिए।

shaalaa.com
उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
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Chapter 1.8: कर्मवीर - स्‍वाध्याय [Page 28]

APPEARS IN

Balbharati Hindi (Composite) - Lokvani Class 10 Maharashtra State Board
Chapter 1.8 कर्मवीर
स्‍वाध्याय | Q ६ | Page 28

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