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Question
निम्नलिखित काव्य पंवितियाँ पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:
घाट से आते हुए कदंब के नीचे खड़े कनु को ध्यानमग्न देवता समझ, प्रणाम करने जिस राह से तू लौटती थी बावरी आज उस राह से न लौट उजड़े हुए कुंज रौंदी हुई लताएँ आकाश पर छाई हुई धूल क्या तुझे यह नहीं बता रही कि आज उस राह से कृष्ण की अठारह अक्षौहिणी सेनाएँ युद्ध में भाग लेने जा रही हैं! आज उस पथ से अलग हटकर खड़ी हो बावरी! लताकुंज की ओट छिपा ले अपने आहत प्यार को। |
- कारण लिखिए: [2]
- राधा को उस राह से ना लौटने के लिए कहा - ______
- राधा को पथ से हटकर खड़े होने को कहा - ______
- उचित मिलान कीजिए: [2]
(१) ध्यानमग्न राधा (२) बावरी प्यार (३) अक्षौहिणी देवता (४) आहत सेनाएँ
- "वर्तमान युग में युद्ध नहीं शांति चाहिए" इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। [2]
Solution
-
- राधा को उस राह से ना लौटने के लिए कहा गया क्योंकि वह रास्ता उस दिन युद्ध की विनाशकारी गतिविधियों से प्रभावित था। उस पथ पर युद्ध की भयावहता का प्रभाव पड़ा है। इस कारण राधा को सुझाव दिया गया कि वह उस पथ से ना लौटे और अपने आहत प्यार को लताकुंज की ओट में छिपा ले।
- राधा को पथ से हटकर खड़े होने को कहा गया क्योंकि उस पथ पर युद्ध का प्रभाव था और उसके आहत प्यार को बचाने के लिए उसे सुरक्षित स्थान पर रहने की आवश्यकता थी।
(१) ध्यानमग्न देवता (२) बावरी राधा (३) अक्षौहिणी सेनाएँ (४) आहत प्यार - वर्तमान युग में, जहाँ वैश्विकरण और तकनीकी प्रगति ने दुनिया को एक सूत्र में बांधा है, वहाँ युद्ध नहीं बल्कि शांति की अत्यधिक आवश्यकता है। युद्ध से केवल विनाश और दुःख का संचार होता है, वहीं शांति से सामाजिक समरसता, आर्थिक स्थिरता और संस्कृतियों का सम्मान सुनिश्चित होता है। शांति के माध्यम से ही हम विकास के नए आयामों को छू सकते हैं और एक स्थायी तथा समृद्ध समाज का निर्माण कर सकते हैं। इसलिए, हमें युद्ध के बजाय वार्ता, सहयोग और सामूहिक प्रयासों पर जोर देना चाहिए, जिससे शांति और समृद्धि सुनिश्चित हो।
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कृति पूर्ण कीजिए :
कनुप्रिया की तन्मयता के गहरे क्षण सिर्फ - ____________
कृति पूर्ण कीजिए :
कनुप्रिया के अनुसार यही युद्ध का सत्य स्वरूप है - ____________
कृति पूर्ण कीजिए :
कनुप्रिया के लिए वे अर्थहीन शब्द जो गली-गली सुनाई देते हैं -____________
कारण लिखिए :
कनुप्रिया के मन में मोह उत्पन्न हो गया है।
कारण लिखिए :
आम की डाल सदा-सदा के लिए काट दी जाएगी।
‘व्यक्ति को कर्मप्रधान होना चाहिए’, इस विषय पर अपना मत लिखिए ।
‘वृक्ष की उपयोगिता’, इस विषय पर अपने विचार लिखिए।
‘कवि ने कनुप्रिया के माध्यम से आधुनिक मानव की व्यथा को शब्दबद्ध किया है’, इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग ८० से १०० शब्दों में लिखिए:
राधा की दृष्टि से जीवन की सार्थकता बताइए।
निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:
नीचे की घाटी से सुनो कनु, सुनो अब इन सूने शिखरों, मृत्यु घाटियों में बने |
(१) संजाल पूर्ण कीजिए: (२)
(२) पद्यांश में आए हुए निम्न शब्दों का चयन परिवर्तन कीजिए: (२)
- बाँह - ______
- सेतु - ______
- लीला - ______
- घाटी - ______
(३) ‘वृक्ष की उपयोगिता’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ४५ शब्दों में लिखिए। (२)
कनुप्रिया की दृष्टि से जीवन की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:
अपनी जमुना में धारा में बह-बहकर आते हुए टूटे रथ हारी हुई सेनाएँ, जीती हुई सेनाएँ (जैसे बुलाते थे भटकी हुई गायों को) जितनी समझ तुमसे अब तक पाई है कनु, अर्जुन की तरह कभी शब्द : अर्थहीन शब्द, शब्द, शब्द, ............. |
1. कृति पूर्ण कीजिए: (2)
कनुप्रिया के अनुसार यही युद्ध का सत्य स्वरूप हैं:
- ____________
- ____________
- ____________
- ____________
2. कृति पूर्ण कीजिए: (2)
- कनुप्रिया कनु से इनकी तरह सब कुछ समझना चाहती है सार्थकता-
- कनुप्रिया की तन्मयता के गहरे क्षण -
- कनुप्रिया के लिए अर्थहीन शब्द जो गली -गली सुनाई देते हैं -
- कनुप्रिया के लिए वे सारे शब्द तब अर्थहीन है -
3. निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर 40 से 50 शब्दों में लिखिए: (2)
'युद्ध से विनाश एवं शांति से विकास होता है' - इस विषय पर अपने विचार लिखिए।
निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
सेतु: मैं सुनो कनु, सुनो अमंगल छाया घाट से आते हुए उजड़े हुए कुंज आज उस पथ से अलग हटकर खड़ी हो |
1. निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर लिखिए। (2)
- उपर्युक्त पद्यांश में प्रयुक्त एक सुंदर वृक्ष का नाम लिखिए।
- कृष्ण की कितनी सेनाएँ युद्ध में भाग लेने जा रही है ?
- सेतु के दोनों छोर कौन से हैं?
- कृष्ण की सेनाएँ कौनसे मार्ग से जा रही हैं ?
2. उत्तर लिखिए। (2)
राधा का सेतु जिस्म ऐसा है .....
- ____________
- ____________
- ____________
- ____________
3. निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर 40 से 50 शब्दों में लिखिए: (2)
“वृक्ष की उपयोगिता" इस विषय पर अपने विचार लिखिए।
'कनुप्रिया' में अवचेतन मन में बैठी राधा चेतनावस्था में स्थित राधा को संबोधित करती है।” इस बात को स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
दुख क्यों करती है पगली छूट गए है, एक प्रश्न अच्छा, मेरे महान कनु, मान लो कि |
1. निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर लिखिए: (2)
- कनुप्रिया को गर्व क्यों करना चाहिए?
- कनुप्रिया को उदास क्यों नहीं होना चाहिए?
- कृति पूर्ण कीजिए।
कनुप्रिया की तन्मयता के गहरे क्षण सिर्फ ______।
2. निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए - (2)
- तन्मयता - ______
- सुकोमल - ______
- नितांत - ______
- अनभिज्ञ - ______
3. निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर 40 से 50 शब्दों में लिखिए: (2)
प्राचीनकाल एवम् आधुनिक काल कीं सेनाओं के बारे में अपना मत स्पष्ट कीजिए।
'मेरा यह सेतु-रूपी शरीर काँपता हुआ निर्जन और निरर्थक रह गया है।'- इसे 'कनुप्रिया' के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
भगवान की सर्वश्रेष्ठ उपासना के रूप में इसे प्रतिष्ठित किया गया है:
निम्नलिखित काव्य पंक्तियों को पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:
यह आम्रवृक्ष की डाल आज यह आम की डाल आज खंड-खंड हो जाएगा तो क्या- |
(१) कारण लिखिए: (२)
- आम्रवृक्ष की डाल सदा के लिए काट दी जाएगी - ______
- छायादार अशोक वृक्ष खंड-खंड हो जाएगा - ______
(२) उचित मिलान कीजिए: (२)
(१) | वृक्ष | टहनी |
(२) | ग्राम | राह |
(३) | पथ | गाँव |
(४) | डाल | पेड़ |
(३) ‘युद्ध के दुष्परिणाम’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग ८० से १०० शब्दों में लिखिए:
"राधा ने चरम तन्मयता के क्षणों में डूबकर जीवन की सार्थकता पाई है," इस कथन को स्पष्ट कौजिए।