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पर एक दिन की बात, बच्चों ने कुछ ज्‍यादा ही चिढ़ा दिया, तो ताई अपना गुस्सा काबू नहीं कर पाईं। लाठी लेकर पीछे-पीछे दौड़ पड़ीं। ‘गुस्‍से पर काबू रखना’ इसपर अपने विचार लिखिए। - Hindi [हिंदी]

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Question

पर एक दिन की बात, बच्चों ने कुछ ज्‍यादा ही चिढ़ा दिया, तो ताई अपना गुस्सा काबू नहीं कर पाईं। लाठी लेकर पीछे-पीछे दौड़ पड़ीं। पर अभी कुछ ही आगे गई थीं कि एक गड्ढ़े में उनका पैर पड़ा लाठी दूर जा गिरी और ताई बुरी तरह लड़खड़ाकर जमीन पर आ गिरीं। सिर से खून निकलने लगा। एक पैर भी बुरी तरह मुड़ गया था और ताई हाय-हाय कर रही थीं। उन्होंने खुद उठने की दो-एक बार कोशिश की, पर लाचार थीं। बच्चे दूर से यह देख रहे थे। पर पास आने की उनकी हिम्‍मत नहीं हुई। आखिर गोलू और भीमा ने किसी तरह आगे आकर उन्हें सहारा दिया और उन्हें घर के अंदर ले गए।

‘गुस्‍से पर काबू रखना’ इसपर अपने विचार लिखिए।

Answer in Brief

Solution

विचारों का कभी कोई आकर, भार या चेहरा नहीं होता। ये तो आपकी कल्पना का एक फल मात्र है। लेकिन हमारे जीवन पर इन विचारों का प्रभाव बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए, बेहतर जीवन बनाने के लिए सकारात्मक विचार की ऊर्जा का होना बहुत ज़रूरी है। हम अक्सर अपने विचारों को कभी फिल्टर करने की कोशिश नहीं करते। इस टिप को अपनाकर गुस्से पर काबू पाना आसान हो जाता है। क्षमा एक शक्तिशाली उपकरण है। यदि आप गुस्से के सकारात्मक भावनाओं को बाहर निकालने की अनुमति देते हैं, तो आप अपने आप को अपनी कड़वाहट से निकाल सकते हैं। आपको शारीरिक और भावनात्मक रूप से मजबूत होने के लिए पर्याप्त नींद लेने की जरूरत होती है। नींद पूरी न होने पर आप चिड़चिड़े हो सकते हैं। इसकी वजह से गुस्से का स्तर और बढ़ सकता है। आपको तनावपूर्ण परिस्थितियों में शांत रहने में मदद करती है। अपनी नींद-गुणवत्ता में सुधार के लिए आहार या जीवन शैली में परिवर्तन करें। आपको गुस्सा आने का एक कारण यह भी हो सकता है कि आपके पास खुद के लिए समय ही नहीं बचता हो और आप हमेशा उन चीजों को टाल देते हों जो आप करना चाहते हैं। इन कारणों के चलते गुस्से पर काबू पाना थोड़ा और कठिन हो जाता है। ऐसे में अगर आपको पेंटिंग, वॉकिंग, डांसिंग आदि से प्यार है तो, अपने दैनिक या साप्ताहिक कार्यक्रम में उनके लिए कैसे भी करके समय निकालें। उन परिस्थितियों, स्थानों या चीज़ों से बचें जो आपको क्रोधित करती हैं। ध्यान आपको तनाव और चिंता से छुटकारा पाने में मदद कर सकता है, जो क्रोध का कारण बनते हैं।

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सींकवाली
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Chapter 1.02: सींकवाली - स्वाध्याय [Page 6]

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Balbharati Hindi - Kumarbharati 9 Standard Maharashtra State Board
Chapter 1.02 सींकवाली
स्वाध्याय | Q (४) | Page 6

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पर एक दिन की बात, बच्चों ने कुछ ज्‍यादा ही चिढ़ा दिया, तो ताई अपना गुस्सा काबू नहीं कर पाईं। लाठी लेकर पीछे-पीछे दौड़ पड़ीं। पर अभी कुछ ही आगे गई थीं कि एक गड्ढ़े में उनका पैर पड़ा लाठी दूर जा गिरी और ताई बुरी तरह लड़खड़ाकर जमीन पर आ गिरीं। सिर से खून निकलने लगा। एक पैर भी बुरी तरह मुड़ गया था और ताई हाय-हाय कर रही थीं। उन्होंने खुद उठने की दो-एक बार कोशिश की, पर लाचार थीं। बच्चे दूर से यह देख रहे थे। पर पास आने की उनकी हिम्‍मत नहीं हुई। आखिर गोलू और भीमा ने किसी तरह आगे आकर उन्हें सहारा दिया और उन्हें घर के अंदर ले गए।

संजाल पूर्ण कीजिएः


पर एक दिन की बात, बच्चों ने कुछ ज्‍यादा ही चिढ़ा दिया, तो ताई अपना गुस्सा काबू नहीं कर पाईं। लाठी लेकर पीछे-पीछे दौड़ पड़ीं। पर अभी कुछ ही आगे गई थीं कि एक गड्ढ़े में उनका पैर पड़ा लाठी दूर जा गिरी और ताई बुरी तरह लड़खड़ाकर जमीन पर आ गिरीं। सिर से खून निकलने लगा। एक पैर भी बुरी तरह मुड़ गया था और ताई हाय-हाय कर रही थीं। उन्होंने खुद उठने की दो-एक बार कोशिश की, पर लाचार थीं। बच्चे दूर से यह देख रहे थे। पर पास आने की उनकी हिम्‍मत नहीं हुई। आखिर गोलू और भीमा ने किसी तरह आगे आकर उन्हें सहारा दिया और उन्हें घर के अंदर ले गए।

उत्तर लिखिए:

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संजाल पूर्ण कीजिए:


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पर एक दिन की बात, बच्चों ने कुछ ज्‍यादा ही चिढ़ा दिया, तो ताई अपना गुस्सा काबू नहीं कर पाईं। लाठी लेकर पीछे-पीछे दौड़ पड़ीं। पर अभी कुछ ही आगे गई थीं कि एक गड्ढ़े में उनका पैर पड़ा लाठी दूर जा गिरी और ताई बुरी तरह लड़खड़ाकर जमीन पर आ गिरीं। सिर से खून निकलने लगा। एक पैर भी बुरी तरह मुड़ गया था और ताई हाय-हाय कर रही थीं। उन्होंने खुद उठने की दो-एक बार कोशिश की, पर लाचार थीं। बच्चे दूर से यह देख रहे थे। पर पास आने की उनकी हिम्‍मत नहीं हुई। आखिर गोलू और भीमा ने किसी तरह आगे आकर उन्हें सहारा दिया और उन्हें घर के अंदर ले गए।

परिच्छेद में आए शब्‍द युग्‍म:


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