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Question
Read the extract given below and answer· in Hindi the questions that follow:
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिंदी में लिखिए:
ऐसो को उदार जग माही। बिनु सेवा जो द्रवै दीन पर राम सरिस कोउ नाहीं। जो गति जोग विराग जतन करि, नहिं पावत मुनि-ज्ञानी। सो गति देते गीध सबरी कहूँ प्रभु न बहुत जिय जानी। जो संपत्ति दस सीस अरप करि रावन सिव पहँ लीन्ही। सो संपदा-विभीषण कहँ अति सकुच सहित प्रभु दीन्ही। तुलसीदास सब भाँति सकल सुख जो चाहसि मन मेरो। तौ भजु राम, काम सब पूरन करै कृपानिधि तेरो। विनय के पद-तुलसीदास |
- तुलसीदास जी किस काल एवं शाखा के कवि थे? उनकी भक्ति-भावना पर प्रकाश डालिए। [2]
- प्रस्तुत पद में “गति” शब्द से क्या तात्पर्य है? राम ने गीध और सबरी को यह गति कब प्रदान की थी? [2]
- विभीषण का परिचय दीजिए। राम ने उसे कौन-सी संपदा प्रदान कर अपनी उदारता दिखाई तथा उदारता दिखाते समय उनका भाव किस प्रकार था? [3]
- पद की अंतिम दो पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए। [3]
Answer in Brief
Solution
- तुलसीदास जी भक्तिकाल के कवि थे और वे रामभक्ति शाखा के प्रमुख कवि थे। उनकी भक्ति-भावना राम के प्रति अत्यंत गहरी और निरंतर थी। उन्होंने अपने काव्य में भगवान राम की महिमा और उनकी उदारता का वर्णन किया है।
- प्रस्तुत पद में “गति” का तात्पर्य मोक्ष या परमगति से है। राम ने गीध (जटायु) को उसकी मृत्यु के बाद और सबरी को उसके निष्ठावान सेवा और भक्ति के कारण यह गति प्रदान की थी।
- विभीषण रावण के छोटे भाई थे, जिन्होंने राम की शरण ली थी। राम ने विभीषण को लंका का राज्य प्रदान किया, जो पहले रावण का था। राम ने यह संपदा विभीषण को अत्यंत उदारता और विनम्रता के साथ प्रदान की।
- अंतिम दो पंक्तियों का भाव यह है कि तुलसीदास कहते हैं कि यदि मनुष्य सभी प्रकार के परम सुख और संतोष प्राप्त करना चाहता है, तो उसे भगवान राम की भक्ति करनी चाहिए। राम की कृपा से उसके सभी कार्य पूर्ण होंगे और उसकी सभी इच्छाएं पूरी होंगी।
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विनय के पद
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