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Question
रूपाभ्यासं कुरुत।
विन्देमहि
Solution
रूपम् | धातुः, गणः, पदम् | लकारः | पुरुषः | वचनम् |
विन्देमहि | विन्द् (६ आ.प.) | विधिलिङ्लकारः | उत्तमः | बहुवचनम् |
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RELATED QUESTIONS
सन्धिविग्रहं कुरुत।
शत्रुभ्यामिव = ______
समानार्थकशब्दं पाठात् लिखत।
वेदना - ______
रूपपरिचयं कुरुत।
महताम्
सन्धिविग्रहं कुरुत।
लघुभारमिव = ______
सन्धिविग्रहं कुरुत।
तथैव = ______
सूचनानुसारं परिवर्तनं कुरुत।
अहं द्विवारं स्नानं करोमि स्म। ('स्म' निष्कासयत)
प्रश्ननिर्माणं कुरुत।
अमरकोषः संस्कृतशब्दानां सङ्ग्रहग्रन्थः।
शब्दस्य वर्णविग्रहं कुरुत।
वर्तन्ते - ______
समानार्थकशब्दं लिखत।
अमरकोषः - ______
सन्धिविग्रहं कुरुत।
ममाज्ञया = ______
क्रमानुसारं सचयत।
अ) त्रि-अक्षरयुक्ते शब्दे 'य' मध्ये तिष्ठति।
आ) शब्दस्य आरम्भे 'न' विद्यते।
इ) शब्दस्य अन्ते अपि 'न' विद्यते।
श्लोकात् षष्ठयन्तपदानि चिनुत लिखत च।
वर्णविग्रहं कुरुत।
रूपाढ्याम् - ______
वर्णविग्रहं कुरुत।
स्वभावकृपणः - ______
सूचनानुसार वाक्यपरिवर्तन कुरुत।
बालकस्य सोमशर्मा इति नाम करिष्यामि। (कर्तृपदस्थाने 'सः' योजयत।)
समस्तपदं कुरुत।
लगुडस्य प्रहारः - ______
धातो हेत्वर्थकम् अव्ययं प्रयुज्य वाक्यं पुनर्लिखत।
शृगालः मांसखण्डं (लभ्) काकस्य स्तुतिं करोति।
अयादिसन्धिः।
ओ/औ + कोऽपि स्वरः = अव्/आव्
______ + एव = द्वावेव।
यणसन्धिः।
उ/ऊ + विजातीयः स्वरः = व्।
______ + एतत् = खल्वेतत्।
विशेषण-विशेष्ययोः युग्मं पूरयत।
पुंलिङ्गम् | स्त्रीलिङ्गम् | नपुंसकलिङ्गम् | विभक्तिः |
पवित्रः जलाशयः | (पवित्र) नदी | (पवित्र) गङ्गाजलम् | प्रथमा |
(नूतन) मण्डपम् | नूतनां भाषाम् | (नूतन) मन्दिरम् | द्वितीया |
समृद्धेन (कोष) | (समृद्ध) परम्परया | समृद्धेन (नगर) | तृतीया |
(कोमल) स्वभावाय | कोमलायै (लता) | (कोमल) पुष्पाय | चतुर्थी |
प्राधीनात् (उपाय) | (पराधीना) बुद्ध्याः | (पराधीन) जीवनात् | पञ्चमी |
(उत्तम) पुरुषस्य | उत्तमायाः (पत्रिका) | उत्तमस्य (वृत्तपत्र) | षष्ठी |
(स्थूल) पुत्रे | स्थूलायाम् (कन्या) | (स्थूल) पात्रे | सप्तमी |
हे (श्रेष्ठ) ऋषे | हे श्रेष्ठे (तपस्विनी) | हे (श्रेष्ठ) औषध | सम्बोधनम् |
योग्यरूपं योजयत।
मयूरस्य ______ दीर्घा। (चञ्चु)
चतुर्थं पदं लिखत।
शम्भु - शम्भूना :: शिशु - ______।
पूर्वकालवाचक -धातुसाधित-अव्ययं उपयुज्य वाक्यं लिखत।
सिंहं ______ (दृश्) मुकुलः भीतः।
तालिकां पूरयत।
क्रियापदम् | मूलधातुः | गणः, पदम् | लकारः | पुरुषः | वचनम् |
१. क्षमस्व | ______ | ______ | लोट् | ______ | ______ |
२. लभताम् | ______ | १ आ.प. | ______ | ______ | ______ |
३. नृत्यन्तु | ______ | ______ | ______ | ______ | बहुवचनम् |
४. रचय | रच् | ______ | ______ | ______ | ______ |
५. उत्तरत | उत् + तृ-तर् | ______ | ______ | ______ | ______ |
६. लिखत | ______ | ६ प. प. | ______ | ______ | ______ |
७. गायाम | ______ | ______ | लोट् | ______ | ______ |
८. भवन्तु | ______ | ______ | ______ | प्रथम | ______ |
विधिलिङ्रूपाणि चिनुत लिखत च।
न कश्चन मातरं वा मातृदेशं वा विस्मरेत्।
रूपाभ्यासं कुरुत।
रमेथाः
उचितलिङ्गानुसार पृथक्कुरुत।
पुं. | स्त्री. | नपुं. |
______ | ______ | ______ |
(योषित्, भूभृत्, दिनकृत्, विद्युत्, वियत्, क्ष्माभृत्, तडित्)
'क्त' प्रत्ययान्तरूपैः रिक्तस्थानानि पूरयत।
शिक्षकेण पाठः उच्चैः ______। (पठ्)
सर्वनामतालिकां पूरयत।
एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्तिः |
अस्याम् | ______ | ______ | सप्तमी |
______ | ______ | भवतीभ्यः | चतुर्थी |
______ | इमे | इमानि | प्रथमा |
सन्धिकोषः।
सर्वमेव = सर्वम् + ______।
सन्धिकोषः।
परैस्तु = ______ + तु।
सन्धिकोषः।
______ = बाल्यात् + एव।
सन्धिकोषः।
स्वदेशमपाहरन् = ______ + अपाहरन्।
सन्धिकोषः।
______ = पणिभिः + यद्।
सन्धिकोषः।
गङ्गायाश्चञ्चलतरे = ______ + चञ्चलतरे।
सन्धिकोषः।
तस्याहम् = तस्य + ______।
सन्धिकोषः।
मणिर्न = ______ + न।
अव्ययस्य विशिष्टं अव्ययरूपस्य आवश्यकता भवति। अधोक्तम् अस्ति।
गम् = ______