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Question
रूपाणि परिचिनुत।
अ. क्र. | धातुः | गणः/पदं | कालः | पुरषः | वचनम् | |
१ | प्राप्स्यामि | ______ | ______ | ______ | ______ | ______ |
२ | अहरत् | ______ | ______ | ______ | ______ | ______ |
३ | पूज्यते | ______ | ______ | ______ | ______ | ______ |
४ | चोरयतु | ______ | ______ | ______ | ______ | ______ |
Solution
अ. क्र. | धातुः | गणः/पदं | कालः | पुरषः | वचनम् | |
१ | प्राप्स्यामि | प्र + आप् | पञ्चमः/परस्मैपदम् | लृट्लकारः | उत्तमः | एकवचनम् |
२ | अहरत् | ह - हर् | प्रथमः/परस्मैपदम् | लङ्लकारः | प्रथमः | एकवचनम् |
३ | पूज्यते | पूज् | दशमः/आत्मनेपदम् | लट्लकारः | प्रथमः | एकवचनम् |
४ | चोरयतु | चुर् - चोर् | दशमः/परस्मैपदम् | लोट्लकारः | प्रथमः | एकवचनम् |
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समानार्थकशब्दान् लिखत।
धनम् - ______
सन्धिं कुरुत।
किम् + नु = ______
सन्धिविग्रह कुरुत।
नार्यस्तु = ______
एकवचने परिवर्तयत।
एताः न पूज्यन्ते।
सूचनानुसारं परिवर्तनं कुरुत।
अहं द्विवारं स्नानं करोमि स्म। ('स्म' निष्कासयत)
सन्धिविग्रहं कुरुत।
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क्रमानुसारं सचयत।
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आ) शब्दस्य आरम्भे 'न' विद्यते।
इ) शब्दस्य अन्ते अपि 'न' विद्यते।
सन्धिं कुरुत।
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विशेषणं लिखत।
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भवान्/भवती -स्थाने त्वं योजयित्वा वाक्यानि लिखत।
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______ वैमानिकम् | ______ वैमानिकौ | कुशलान् ______ | द्वितीया |
कुशलेन ______ | कुशलाभ्यां ______ | ______ वैमानिकैः | तृतीया |
______ वैमानिकाय | ______ वैमानिकाभ्यां | कुशलेभ्यः ______ | चतुर्थी |
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______ वैमानिकस्य | ______ वैमानिकयोः | कुशलानां ______ | षष्ठी |
कुशले ______ | ______ वैमानिकयोः | ______ वैमानिकेषु | सप्तमी |
कुशल ______ | ______ वैमानिकौ | कुशलाः ______ | सम्बोधनम् |
योग्यरूपं योजयत।
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त्वान्तं/ल्यबन्तम् अव्ययं निष्कासयत।
सुवर्णा प्रातः उत्थाय ग्रामम् अगच्छत्।
त्वान्तं/ल्यबन्तम् अव्ययं निष्कासयत।
कविः काव्यं विरचय्य गायेत्।
तालिकां पूरयत।
एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्तिः |
______ | ______ | जगन्ति | प्रथमा |
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एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
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सदृश - ______
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एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
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