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सिद्धेश्वरी ने अपने बड़े बेटे रामचंद्र से मँझले बेटे मोहन के बारे में झूठ क्यों बोला? - Hindi (Elective)

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Question

सिद्धेश्वरी ने अपने बड़े बेटे रामचंद्र से मँझले बेटे मोहन के बारे में झूठ क्यों बोला?

Answer in Brief

Solution

घर की स्थिति सही नहीं चल रही थी। रामचंद्र की नौकरी छूट गई थी। उसी के पैसों से घर चल रहा था। ऐसे में जब थका-हारा रामचंद्र बाहर से आकर मोहन के बारे में पूछने लगा, तो सिद्धेश्वरी को झूठ बोलना पड़ा। वह रामचंद्र को यह नहीं बता सकती थी कि मोहन पढ़ने के स्थान पर आवारागर्दी कर रहा है। मोहन पढ़ने के स्थान पर समय नष्ट कर रहा था। अतः यह झूठ बोलकर वह घर में शांति बनाए रखना चाहती थी।
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दोपहर का भोजन
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Chapter 1.2: दोपहर का भोजन - प्रश्न-अभ्यास [Page 33]

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NCERT Hindi - Antar Class 11
Chapter 1.2 दोपहर का भोजन
प्रश्न-अभ्यास | Q 1. | Page 33

RELATED QUESTIONS

कहानी के सबसे जीवंत पात्र के चरित्र की दृढ़ता का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।


कहानी के उन प्रसंगों का उल्लेख कीजिए जिनसे गरीबी की विवशता झाँक रही हो।


'सिद्धेश्वरी का एक दूसरे सदस्य के विषय में झूठ बोलना परिवार को जोड़ने का अनथक प्रयास था' – इस संबंध में आप अपने विचार लिखिए।


'अमरकांत आम बोलचाल की ऐसी भाषा का प्रयोग करते हैं जिससे कहानी की संवेदना पूरी तरह उभरकर आ जाती है।' कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए।


रामचंद्र मोहन और मुंशी जी खाते समय रोटी न लेने के लिए बहाने करते हैं, उसमें कैसी विवशता है? स्पष्ट कीजिए।


सिद्धेश्वरी की जगह आप होते लो क्या करते?


रसोई सँभालना बहुत जिम्मेदारी का काम है - सिद्ध कीजिए। 


आपके अनुसार सिद्धेश्वरी के झूठ सौ सत्यों से भारी कैसे हैं? अपने शब्दों में उत्तर दीजिए।


आशय स्पष्ट कीजिए-

वह मतवाले की तरह उठी और गगरे से लोटा भर पानी लेकर गट-गट चढ़ा गई।


आशय स्पष्ट कीजिए -

यह कहकर उसने अपने मँझले लड़के की ओर इस तरह देखा, जैसे उसने कोई चोरी की हो।


आशय स्पष्ट कीजिए -

मुंशी जी ने चने के दानों की ओर इस दिलचस्पी से दृष्टिपात किया, जैसे उनसे बातचीत करनेवाले हो।


अपने आस-पास मौजूद समान परिस्थितियों वाले किसी विवश व्यक्ति अथवा विवशतापूर्ण घटना का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।


'भूख और गरीबी में प्राय: धैर्य और संयम नहीं टिक पाते हैं।' इसके आलोक में सिद्धेश्वरी के चरित्र पर कक्षा में चर्चा कीजिए।


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