English

समीपी तारों की दूरियाँ ज्ञात करने के लिए लंबन के सिद्धांत का प्रयोग किया जाता है। - Physics (भौतिक विज्ञान)

Advertisements
Advertisements

Question

समीपी तारों की दूरियाँ ज्ञात करने के लिए लंबन के सिद्धांत का प्रयोग किया जाता है। सूर्य के परितः अपनी कक्षा में छः महीनों के अन्तराल पर पृथ्वी की अपनी, दो स्थानों को मिलाने वाली, आधार रेखा AB है। अर्थात आधार रेखा पृथ्वी की कक्षा के व्यास ≈ 3x 1011 m के लगभग बराबर है। लेकिन चूंकि निकटतम तारे भी इतने अधिक दूर हैं कि इतनी लंबी आधार रेखा होने पर भी वे चाप के केवल 1″ (सेकंड, चाप का) की कोटि का लंबन प्रदर्शित करते हैं। खगोलीय पैमाने पर लंबाई का सुविधाजनक मात्रक पारसेक है। यह किसी पिण्ड की वह दूरी है जो पृथ्वी से सूर्य तक की दूरी के बराबर आधार रेखा के दो विपरीत किनारों से चाप के 1′ का लंबन प्रदर्शित करती है। मीटरों में एक पारसेक कितना होता है?

Numerical

Solution

चित्र में S सूर्य तथा E पृथ्वी है। बिंदु O की पृथ्वी से दूरी 1 पारसेक है। पृथ्वी की कक्षा की त्रिज्या `"SE" = "व्यास"/2`

या `"SE" = (3 xx 10^11  "m")/2 = 1.5 xx 10^11 "m"`

प्रश्नानुसार रेखाखंड SE, बिंदु O पर 1" (चाप का) कोण अंतरित करता है। 

अतः `angle"SOE"` = 1" = `(1/(60 xx 60)) "डिग्री"`

= `1/(60 xx 60) xx pi/180 "rad"        [∵ 180^circ = pi " rad"]`

∵ ∠SOE  बहुत छोटा है, अतः दिशाएँ OS तथा OE लगभग सम्पाती होगी। 

∴ दूरी SE को वृत्तीय चाप तथा दूरी OE को त्रिज्या व O को केंद्र माना जा सकता है।

∠SOE (rad. में) = `("चाप"   "SE") / ("त्रिज्या"   "SE")`

या `1/(60 xx 60) xx pi/180 = (1.5 xx 10^11  "m")/(1  "पारसेक")`

= `1  "पारसेक" = (1.5 xx 10^11 xx 60 xx 60 xx 180)/pi "m"`

= `(1.5 xx 60 xx 60 xx 180 xx 10^11)/3.14 "m"`

= `309.55 xx 10^14 ` m

अतः 1 पारसेक = `3.0 xx 10^16` m के बराबर होता है।

shaalaa.com
लम्बाई का मापन - लम्बाइयों का परिसर
  Is there an error in this question or solution?
Chapter 2: मात्रक और मापन - अभ्यास [Page 37]

APPEARS IN

NCERT Physics [Hindi] Class 11
Chapter 2 मात्रक और मापन
अभ्यास | Q 2.19 | Page 37
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×