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वाक्‍यों का उचित क्रम लगाकर लिखिए : सातों तारे मंद पड़ गए। ये मेरी ओर से हैं।सब चीजें हैं दीदी। लोग उसको बेकार ही नहीं, ‘बेगार’ समझते हैं। मानू दीदी काकी की सबसे छोटी बेटी है। - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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Question

वाक्‍यों का उचित क्रम लगाकर लिखिए :

  1. सातों तारे मंद पड़ गए।
  2. ये मेरी ओर से हैं।सब चीजें हैं दीदी।
  3. लोग उसको बेकार ही नहीं, ‘बेगार’ समझते हैं।
  4. मानू दीदी काकी की सबसे छोटी बेटी है।
Short Note

Solution

  1. लोग उसको बेकार ही नहीं, 'बेगार' समझते हैं।
  2. मानू दीदी काकी की सबसे छोटी बेटी है।
  3. सातों तारे मंद पड़ गए।
  4. ये मेरी ओर से हैं। सब चीजें हैं दीदी।
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ठेस
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Chapter 1.1: ठेस (पूरक पठन) - स्‍वाध्याय [Page 47]

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Balbharati Hindi - Lokbharati 10 Standard SSC Maharashtra State Board
Chapter 1.1 ठेस (पूरक पठन)
स्‍वाध्याय | Q (३) | Page 47

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संजाल पूर्ण कीजिए :


कृति पूर्ण कीजिए :

 


कृति पूर्ण कीजिए :


कृति पूर्ण कीजिए :


‘कला और कलाकार का सम्‍मान करना हमारा दायित्‍व है’, इस कथन पर अपने विचारों काे शब्‍दबद्ध कीजिए।


निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए -

बिना मजदूरी के पेट भर भात पर काम करने वाला कारीगर ! दूध में कोई मिंठाई न मिले तो कोई बात नहीं किन्तु बात में जरा भी झाला बह नहीं बरदाश्त कर सकता। 

'सिरचन को लोक चटोर भी समझते हैं। तली बघारी हुई तरकारी, दही की कढ़ी , मलाईवाला दूध, इन सबका प्रबंध पहले कर लो, 'तब सिरचन को बुलाओ, दुम हिलाता हुआ हाजिर हो जाएगा। खाने-पीने में चिकनाई की कमी हुई कि काम की सारी चिकनाई खत्म ! काम अधूरा रखकर उठ खड़ा होगा- 'आज तो अब अधकपाली दर्द से माथा टनटना रहा हैं थोड़ासा रह गया है, किसी दिन आकर पूरा कर दूँगा।'' किसी दिन' माने कभी नहीं! 

मोथी घास और पटरे की रंगीन शीतलपाटी, बाँस की तीलियों की झिलमिलाती चिक, सतरंगे डोर के मोढ़े, भूसी-चुन्नी रखने के लिए मूँज की रस्सी के बड़े-बड़े जाले, हलवाहों के लिए ताल के सूखे पत्तों की छतरी-टोपी तथा इसी तरह के बहुत-से काम हैं जिन्हें'सिरचन के सिवा गाँव में ओर कोई नहीं जानता। यह दूसरी बात है कि अब गाँव में ऐसे कामों को बेकाम का काम समझते हैं लोग। बेकामका काम जिसकी मजदूरी में अनाज या पैसे देने की कोई जरूरत नहीं। पेट भर खिला दो, काम पूरा होने पर एकाध पूराना- धुराना कपड़ादेकर विदा करो। वह कुछ भी नहीं बोलेगा।....

(1) लिखिए-   (2)

गद्यांश में उल्लेखित सिरचन की पसंद की चीजें-

  1. ____________
  2. ____________

(2) 'हस्तकला को बढ़ावा मिलना चाहिए' विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।   (2)


निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

मोथी घास और पटरे की रंगीन शीतलपाटी, बाँस की तीलियों की झिलमिलाती चिक, सतरंगे डोर के मोढ़े, भूसी-चुन्नी रखने के लिए मूँज की रस्‍सी के बड़े-बड़े जाले, हलवाहों के लिए ताल के सूखे पत्‍तों की छतरी-टोपी तथा इसी तरह के बहुत-से काम हैं जिन्हें सिरचन के सिवा गाँव में और कोई नहीं जानता। यह दूसरी बात है कि अब गाँव में ऐसे कामों को बेकाम का काम समझते हैं लोग।

(1) लिखिए- (2)

ग्रामीण समाज की हस्तनिर्मित वस्तुएँ-

  1. ______
  2. ______

(2) ग्रामीण हस्तकला पर 25-30 शब्दों में प्रकाश डालिए। (2)


निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

           मानू पान सजाकर बाहर बैठकखाने में भेज रही थी। चुपके से पान का एक बीड़ा सिरचन को देती हुई इधर-उधर देखकर बोली ‘‘सिरचन दादा, काम-काज का घर! पाँच तरह के लोग पाँच किस्‍म की बात करेंगे। तुम किसी की बात पर कान मत दो।’’ सिरचन ने मुस्‍कराकर पान का बीड़ा मुँह में ले लिया। चाची अपने कमरे से निकल रही थी। सिरचन को पान खाते देखकर अवाक् हो गई। सिरचन ने चाची को अपनी ओर अचरज से घूरते देखकर कहा, ‘‘छोटी चाची, जरा अपनी डिबिया का गमकौआ जर्दा खिलाना। बहुत दिन हुए ...।’’

           चाची कई कारणों से जली-भुनी रहती थी सिरचन से। गुस्‍सा उतारने का ऐसा मौका फिर नहीं मिल सकता। झनकती हुई बोली, ‘‘तुम्‍हारी बढ़ी हुई जीभ में आग लगे। घर में भी पान और गमकौआ जर्दा खाते हो?... चटोर कहीं के!’’ मेरा कलेजा धड़क उठा... हो गया सत्‍यानाश! बस, सिरचन की उँगलियों में सुतली के फंदे पड़ गए। मानो, कुछ देर तक वह चुपचाप बैठा पान को मुँह में घुलाता रहा फिर अचानक उठकर पिछवाड़े पीक थूक आया। अपनी छुरी, हँसिया वगैरह समेट-सँभालकर झोले में रखे। टँगी हुई अधूरी चिक पर एक निगाह डाली और हनहनाता हुआ आँगन से बाहर निकल गया।

(1) लिखिए- (2)

मोनू ने सिरचन से क्या कहा?

  1. ______
  2. ______

(2) सिरचन ने अपनी बेइज्जती महसूस करने के बाद क्‍या कदम उठाया? इस विषय पर 25-30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)


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