Advertisements
Advertisements
Question
वान्टहॉफ कारक की सहायता से समझाइए कि अणुसंख्यक गुण मापन विधि द्वारा कुछ विलेयों के लिए निर्धारित द्रव्यमान असामान्य क्यों होता है।
Solution
कुछ यौगिक उपयुक्त विलायक में घोलने पर वियोजित अथवा संगुणित हो जाते हैं।
उदाहरणार्थ, हाइड्रोजन बंध बनने के कारण एथेनॉइक अम्ल का बेन्जीन में द्विलकीकरण होता है। जबकि जल में घोले जाने पर यह वियोजित होकर आयन बनाता है। इसके परिणामस्वरूप विलयन में रासायनिक स्पीशीज़ की संख्या विलयन बनाने के लिए मिलाई गई विलेय की रासायनिक स्पीशीज़ की संख्या की तुलना में कम अथवा अधिक हो जाती है। चूंकि अणुसंख्यक गुणों का 'परिमाण विलेय कणों की संख्या पर निर्भर करता है, इसलिए यह आशा की जाती है कि अणुसंख्यक गुणों के आधार पर ज्ञात किया गया द्रव्यमान अनुमानित मान अथवा सामान्य मान से कम अथवा अधिक प्राप्त होगा तथा इसे असामान्य आण्विक द्रव्यमान कहते हैं।
विलयन में अणुओं के संगुणन अथवा वियोजन के निर्धारण के लिए वान्टहॉफ ने एक कारक प्रस्तावित किया जिसे वान्टहॉफ कारक, i, कहते हैं। इसे निम्नलिखित प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है-
i = `"अनुमानित मोलर द्रव्यमान"/"असामान्य मोलर द्रव्यमान"`
i = `"प्रेक्षित अणुसंख्य गुणधर्म"/"परिकलित अणुसंख्य गुणधर्म"`
= `"संगुणन/वियोजन के उपरांत कणों के मोलों की कुल संख्या"/"संगुणन/वियोजन से पूर्व कणों के मोलों की कुल संख्या"`
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
शक्कर के 5% (द्रव्यमान) जलीय विलयन का हिमांक 271 K है। यदि शुद्ध जल का हिमांक 273.15 K है तो ग्लूकोस के 5% जलीय विलयन के हिमांक की गणना कीजिए।
अणुसंख्य गुणधर्म ______पर निर्भर करते हैं।
दिए गए ताप पर एक सांद्र विलयन के परासरण दाब की तुलना ______।
चित्र को देखकर सही विकल्प को चुनिए।
दो द्रव A और B एक विशिष्ट संघटन में न्यूनतम क्वथनांकी स्थिरक्वाथी बनाते हैं तब ______।
समपरासरी विलयनों में ______ समान होने चाहिए।
- विलेय
- घनत्व
- क्वथनांक में उन्नयन
- हिमांक में अवनमन
अणुसंख्य गुणधर्म तब प्रेक्षित होते हैं जब ______।
- किसी अवाष्पशील ठोस को वाष्पशील द्रव में घोला जाता है।
- किसी अवाष्पशील द्रव को एक अन्य वाष्पशील द्रव में घोला जाता है।
- किसी गैस को अवाष्पशील द्रव में घोला जाता है।
- एक वाष्पशील तरल दूसरे वाष्पशील तरल में घुल जाता है।
जलीय जीव, गरम जल की तुलना में ठंडे जल में अधिक सहज क्यों महसूस करते है?
अभिकथन - जब एक अर्धपारगम्य झिल्ली द्वारा एक विलयन को शुद्ध विलायक से पृथक किया जाता है तो शुद्ध विलायक की ओर से विलायक के अणु झिल्ली में से होकर विलयन की ओर जाते हैं।
तर्के - विलायक का विसरण उच्च सांद्रता वाले विलयन क्षेत्र से निम्न सांद्रता वाले विलयन क्षेत्र की ओर होता है।
आप अंडे की अर्धपारगम्य झिल्ली को हानि पहुँचाए बिना इस पर से कैल्सियम कार्बोनेट की कठोर सतह को कैसे हटा सकते हैं? क्या इस अंडे की आकृति को बदले बिना इसे एक संकरे मुँह वाली बोतल में प्रवेशित किया जा सकता है? इसमें सम्मिलित प्रक्रिया को समझाइए।