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Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 7th Standard

यदि मैं अंतरिक्ष यात्री बन जाऊँ तो .... - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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Question

यदि मैं अंतरिक्ष यात्री बन जाऊँ तो ....

Long Answer

Solution 1

यदि मैं अंतरिक्ष यात्री बन जाऊँ तो .... अंतरिक्ष यात्रियों राकेश शर्मा और सुनीता विलियम्स के बारे में काफी कुछ सुन रखा है। दोनों के बारे में गूगल पर दिलचस्प जानकारी प्राप्त करने और टीवी चैनलों पर कई अंतरिक्ष संबंधी कार्यक्रम देखने के बाद मेरे मन में भी अंतरिक्ष यात्री बनने की प्रबल इच्छा जाग उठी है। अगर मेरा सपना साकार हो जाए और मैं किसी दिन सचमुच अंतरिक्ष यात्री बन जाऊँ तो सबसे पहले यही जानना चाहूँगी कि अंतरिक्ष से हमारी पृथ्वी और प्यारा भारतवर्ष दिखता कैसा है! अंतरिक्ष यान में मैं यह पता लगाने की कोशिश करूँगी कि यात्री वहाँ कैसे रहते हैं? यान के अंदर दिन-रात का पता कैसे चलता है? वहाँ गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव कैसा होता है? यात्री खाना कैसे खाते हैं और उनकी दिनचर्या क्या होती है? उनका शौचालय और शयनकक्ष कैसा होता है? लेकिन मेरा मुख्य कार्य अंतरिक्ष में जाकर जरूरी शोध-कार्य करना होगा। उदाहरण के तौर पर अपने देश के लिए मौसम विज्ञान से संबंधित जानकारी जुटाना, ताकि प्राकृतिक आपदाओं की समय से पहले सटीक भविष्यवाणी की जा सके। मेरा प्रयास होगा कि पृथ्वी के पड़ोसी ग्रहों के बारे में और पास जाकर सही जानकारी जुटाई जाए, ताकि वहाँ जल और जीवन की संभावनाएँ तलाशी जा सकें, लेकिन यह सब करने के साथ-साथ मैं अंतरिक्ष की सैर भी करना चाहूँगी।

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Solution 2

यदि मैं अंतरिक्ष यात्री बन जाऊँ, तो यह मेरे जीवन का सबसे बड़ा सपना सच होने जैसा होगा। मैं ब्रह्मांड की अनंत गहराइयों को देखने और अंतरिक्ष में पृथ्वी को दूर से निहारने का अद्भुत अनुभव प्राप्त करूंगा। मैं वैज्ञानिक अनुसंधानों में योगदान दूंगा और नई खोजों में अपना योगदान दूंगा।

अंतरिक्ष में जाकर मैं गुरुत्वाकर्षण रहित वातावरण में काम करने, वहां की परिस्थितियों को समझने और भविष्य में मंगल या चंद्रमा पर बसने की संभावनाओं को खोजने का प्रयास करूंगा। पृथ्वी पर लौटकर, मैं अपने अनुभवों को विद्यार्थियों और वैज्ञानिकों के साथ साझा करूंगा ताकि आने वाली पीढ़ी को विज्ञान और अंतरिक्ष के प्रति प्रेरित कर सकूँ।

यह यात्रा न केवल रोमांचक होगी, बल्कि चुनौतियों से भरी भी होगी। मुझे कठोर प्रशिक्षण, अनुशासन और मानसिक व शारीरिक मजबूती की आवश्यकता होगी। लेकिन यदि मुझे यह अवसर मिलता है, तो मैं पूरी मेहनत और लगन के साथ अपने देश और मानवता की सेवा करूंगा।

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उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
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Chapter 1.06: ‘पृथ्‍वी’ से ‘अग्‍नि’ तक - जरा सोचो ....... चर्चा करो [Page 16]

APPEARS IN

Balbharati Hindi - Sulabhbharati 7 Standard Maharashtra State Board
Chapter 1.06 ‘पृथ्‍वी’ से ‘अग्‍नि’ तक
जरा सोचो ....... चर्चा करो | Q (१) | Page 16
Balbharati Integrated 7 Standard Part 2 [Marathi Medium] Maharashtra State Board
Chapter 3.1 'पृथ्वी' से 'अग्नि' तक
अंतःपाठ प्रश्न | Q १२. | Page 51

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