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क्या विकृत शरीर प्रतिमा भोजन विकार को जन्म दे सकती है? इसके विभिन्न रूपों का वर्गीकरण कीजिए। - Psychology (मनोविज्ञान)

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प्रश्न

क्या विकृत शरीर प्रतिमा भोजन विकार को जन्म दे सकती है? इसके विभिन्न रूपों का वर्गीकरण कीजिए।

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

विकारो का एक और समूह जिसमे युवा लोगी की विषयकर रूचि होती है, वह भोजन विकार है। इनमे क्षुधा आभाव, क्षुधतिशरता, अनियंत्रित भोजन सम्मिलित है। क्षुधा आभाव आदमी का अपनी शरीर के बारे में गलत धरणा होती है जिसके वजह से वह अपने को वजन वाला समझने लगता है अक्सर खोने का मना करना। अधिक व्यायाम ब्रध्यता का होना, तथा साधारण आदतो को विकसित करना, जैसे दूसरो के सामने न खाना - इनसे व्यक्ति काफी मात्रा में वजन घटा सकता है। और मृत्यु की स्थिति तक अपने को भूखा रख सकता है क्षुधतिशयता, में व्यक्ति बहुत अधिक मात्रा में खाना खाने लगता है बाद रेचक और मूत्र वर्धक दबाओ के सेवन से या उल्टी करके, खाने को अपने शरीर से साफ कर सकता है। व्यक्ति पेट साफ होने के बाद तनाव और नकारात्मक संवेमोक से अपने को मुक्त महसूस करता है। अतियत्रित भोजन में अत्यधिक भोजन करने का प्रसंग बारंबार पाया जाता है। व्यक्ति में सामान्य की तुलना में जल्दी - जल्दी खाने की आदत होती है और वह तब तक खाता रहता है जब तक की उसे महसुस होता है की वह जरूरत से ज्यादा खा चूका है।

असल में, बहुत अधिक खाना उसी स्थिति में खाया जाता है जबकि व्यक्ति को भूक नहीं लगी होती। वव्यसनात्मक व्यवहार, चाहे इसमें उच्च कैलोरी वाला भोजन करना जिससे अत्यधिक बजन बाढ जाता है या मत दिया कोकेन का दुरूपयोग शामिल है जो आज के समाज में सबसे अधिक गंभीर समस्या है, इसे विशेष रूप हमारे समाज से दूर करना चाहिए।

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प्रमुख मनोवैज्ञानिक विकार
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अध्याय 4: मनोवैज्ञानिक विकार - समीक्षात्मक प्रश्न [पृष्ठ ९४]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Psychology [Hindi] Class 12
अध्याय 4 मनोवैज्ञानिक विकार
समीक्षात्मक प्रश्न | Q 4. | पृष्ठ ९४

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