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प्रश्न
'विच्छेदन' से आप क्या समझते है? इसके विभिन्न रूपों का वर्णन कीजिए।
उत्तर
विचार और संवेगो के बिच संयोजन विच्छेद का हो जाना विच्छेदन कहलाता है। विच्छेदन में आवास्तविक्ता की भावना, मनमुटाव या विरक्ति, व्यक्तित्व लोप और कभी - कभी स्मिता लोप या परिवर्तन भी पाया जाता है। चेतना से अचानक और अस्थाई परिवर्तन को कष्ट कर अनुभवी को रोक देता है, विच्छेदी विकार कहलाता है। इस समूह में स्थितिया शामिल होती है - विच्छेदी स्मृतिलोप, विच्छेदी पहचान विकार, तथा व्यक्तित्व लोप। विछेदी स्मृतिलोप में व्यक्ति अपनी महत्वपूर्ण, व्यक्तिगत सूचनाये, जो दबावपूर्ण और अभिघातक सूचना से संबंधित हो सकती है, का पुनः स्मर्ण करने मैं असमर्थ होता है। विस्मरण मात्रा सामान्य से परे होती है।
इसकी आवश्यकता विशेषताएं घर एव कार्यस्थल से दूर यात्रा, एक नवीन पहचान का अनुमान और पूर्व पहचान को स्मरण करने की अयोग्यता हो सकती है। दूसरा व्यक्तित्व लोप या स्वानुभूति लोप विकार से व्यक्ति प्रत्यावर्ती व्यक्तित्व की कल्पना करते है जो आपस में एक दूसरे के प्रति जानकारी रख सकते है या नहीं रख सकते है। तीसरी विच्छेद ही पहचान ना या बह व्यक्तित्व में व्यक्ति दो या अधिक भिन्न और वेश्मयात्मक व्यक्तित्व को प्रदर्शित करता है। सामान्यता: शारीरिक दुव्यर्वहार की दुर्घटनाओ से जुड़ा होता है। दोनों रहेंगे है कबूतर से जिला योजना शहर होगा। इसमें आत्म प्रात्यक्षण में परिवर्तन होती है। व्यक्ति का वास्तविकता बोध और अस्थाई स्तर पर लुप्त हो जाता है
विच्छेदन के विभिन्न रूप इस प्रकार से हैं
- विच्छेदी स्मृतिलोप में अत्यधिक किन्तु चयनात्मक स्मृतिभृंश होता है जिसका कोई ज्ञात आंगिक कारण (जैसे - सिर में चोट लगना) नहीं है। कुछ लोगो को अपने अतीत के बारे में कुछ भी याद नहीं रहता है। दूसरे लोग कुछ विशिष्ट घटनाएँ, लोग, स्थान या वस्तुएँ याद नहीं कर पाते, जबकि दूसरी घटनाओ के लिए उनकी स्मृति बिलकुल ठीक होती है। यह विकार अक्सर अत्यधिक दबाव से संबंधित होता है।
- विच्छेदी आत्मविस्मृति का एक आवश्यक लक्षण है - घर और कार्य स्थान से अप्रत्यशित यात्रा, एक नई पहचान की अवधारणा तथा पुरानी पहचान को याद न कर पाना। आत्मविस्मृति सामान्यतया समाप्त हो जाती है। जब व्यक्ति अचानक 'जागता है' और आत्मविस्मृति की अवधि में जो कुछ घटित हुआ उसकी कोई स्मृति नहीं रहती।
- विच्छेदी पहचान विकार को अक्सर बहु व्यक्तित्व वाला कहा जाता है। यह सभी विच्छेदी विकारो में सबसे अधिक नाटकीय होती है। अक्सर यह बाल्यावस्था के अभिघातज अनुभवों से संबंधित होता है। इस विकार में व्यक्ति प्रत्यावर्ती व्यक्तित्वों की कल्पना करता है जो आपस में एक - दूसरे के प्रति जानकारी रख सकते हैं या नहीं रख सकते हैं।
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