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लोगो के बिच बात करते समय रोगी बारंबार विषय परिवर्तन करता है, क्या यह मनोविदलता का सकारत्मक या नकारात्मक लक्षन है? मनोविदलता के अन्य लकणो तथा उप - प्रकारो का वर्णन कीजिए। - Psychology (मनोविज्ञान)

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प्रश्न

लोगो के बिच बात करते समय रोगी बारंबार विषय परिवर्तन करता है, क्या यह मनोविदलता का सकारत्मक या नकारात्मक लक्षन है? मनोविदलता के अन्य लकणो तथा उप - प्रकारो का वर्णन कीजिए।

दीर्घउत्तर

उत्तर

लोगों के बीच बात करते समय रोगी बारंबार विषय परिवर्तन करता है। यह मनोविदलता का सकारात्मक लक्षण है।

मनोविचलता के लक्षण - मनोविदलता के लक्षण तीन श्रेणियों में समूहित किए जा सकते हैं।

१. सकारात्मक लक्षण २. नकारात्मक लक्षण ३. मनः चलित लक्षण।

  1. सकारात्मक लक्षणों में व्यक्ति के व्यवहार में 'विकृत अतिशयता' तथा 'विलक्षणता का बढ़ाव' पाया जाता है। भरमासक्ति, असंगठित चिंतन एवं भाषा, प्रवर्धित प्रत्यक्षण और विभ्र्म तथा अनुपयुक्त भाव मनोविदलता में सबसे अधिक पाए जाने वाले लक्षण हैं। मनोविदलता से ग्रसित कई व्यक्तियों में भ्र्मासक्ति विकसित हो जाते है। अमासक्ति एक झूठा विश्वास है जो अपर्याप्त आधार पर बहुत मजबूती से टिका रहता है। इस पर तार्किक युक्ति का कोई प्रभाव नहीं पड़ता तथा वास्तविकता में जिसका कोई आधार नहीं होता। मनोविदलतों में उत्पीड़न भ्र्मासक्ति सर्वार्धिक पाई जाती है। इस तरह के भ्रमासक्ति से ग्रसित लोग यह विश्वास करते है। की लोग उनके विरुद्ध षड्यंत्र कर रहे हैं। उनके जासूसी कर रहे हैं, उनकी मिध्या निंदा की जा रही है, उन्हें धमकी दी जा रही है, उन पर आक्रमण हो रहे हैं या उन्हें जान - बूझकर उत्पीड़ित किया जा रहा है। मनोविदलता से ग्रसित लीगो में संदर्भ अमासक्ति भी हो सकती है जिसमे वे दुसरो के कार्यो या वस्तुओं और घटनाओं के प्रति विशेष और व्यक्तिगत अर्थ जोड़ देते है। अतयहंमन्यता भ्र्मासक्ति में व्यक्ति अपने आपको बहुत सारी विशेष शक्तियों से संपत्र मानता है तथा नियंत्रण भ्र्मासक्ति में वे मानते है की उनके विचार, भावनाएँ और क्रियाएँ दुसरो के द्वारा नियंत्रित की जा रहे हैं। मनोविदलता में व्यक्ति तर्क पूर्ण ढंग से सोच नहीं सकते तथा विचित्र प्रकार से बोलते हैं यह औपचारिक चिंतन विकार उनके संप्रेषण को और कठिन बना देता हैं। उदाहरणार्थ, एक विषय से दूसरे पर तेजी से बदलना जो चिंतन की सामान्य संरचना को गड़बड़ कर देता हैं। और यह तर्कहीन लगने लगता है (विषय के साहचर्य को खोना, विषय - अवपथन), नए शब्दों या मुहावरों की खोज करना (नव शब्द निर्माण) और एक ही विचार को अनुपयुक्त तरह से बार - बार दोहराना (संतनन) मनोविदलता रोगी को विभ्राँति हो सकती है, अर्थात बिना किसी बाह्य उद्दीपक के प्रत्यक्षण करना। मनोविदलता में श्रवण विभ्राँति सबसे ज्यादा पाए जाते है। रोगी ऐसी आवाजे या ध्वनि सुनते हैं। जो सीधे रोगी से शब्द, मुहावरे और वाक्य बोलते है या आपस में रोगी से संबंधित बातें करते हैं इन विभ्राँतियो में अन्य ज्ञानोदिया भी शामिल हो सकती है, जिनमे स्पर्शी विभ्राँति दैहिक विभ्राँति (शरीर के अंदर कुछ घटित होना जैसे - पेट में सैप का रेगना इत्यादि), द्द्ष्ट विभ्राँति (जैसे - लोगो या वस्तुओ की सुस्पष्ट द्द्ष्ट या रंग का अस्पष्ट प्रत्यक्षण), रस्संवेदी विभ्राँति (अर्थात खाने और पाने की वस्तुओ को विचित्र स्वाद) तथा घ्रणा विभ्राँति (धुएँ और जहर की गंध) प्रमुख है।
    मनोविदलता के रोगी अनुपयुक्त भाव भी प्रदर्शित करते हैं अर्थात ऐसे संवेग जो स्थिति के अनुरूप न हों।
  2. नकारात्मक लक्षण 'विकट न्यूनता' होते हैं जिनमे वक् - अयोग्यता, विसंगत एवं कुंठित भाव, इच्छाशक्ति का ह्यस और सामाजिक वितीव्रतन सम्मिलित होते है। मनोविदलता के रोगियों में अलोगिया या वक् - अयोग्यता पाई जाती है जिसमे भाषण, विषय तथा बोलने में कमी पाई जाती है। मनोविदलता के कई रोगी दूसरे अधिकांश लोगो की तुलना में कम क्रोध, उदासी, खुशी तथा अन्य भावनाएं प्रदर्शित करते हैं। इसलिए उनके विसंगत भाव होते हैं। कुछ रोगी किसी प्रकार का संवेग प्रदर्शित नहीं करते जिससे कुंठीन भाव की स्थिति कहते हैं।
  3. मनः चलित लक्षण - मनोविदलता के रोगी मन:चलित लक्षण भी प्रदर्शित करते है। वे अस्वाभविक रूप से चलते तथा विचित्र मुख - विकृतियाँ एवं मुद्राएँ प्रदर्शित करते है। यह लक्षण अपनी चारम - सिमा को प्राप्त कर सकते हैं जिसे कटटोनिया कहते हैं। केटाटॉनिक जड़िमा की अवस्था में लम्बे समय तक रोगी गतिहीन और चुप रहता है।
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प्रमुख मनोवैज्ञानिक विकार
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अध्याय 4: मनोवैज्ञानिक विकार - समीक्षात्मक प्रश्न [पृष्ठ ९४]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Psychology [Hindi] Class 12
अध्याय 4 मनोवैज्ञानिक विकार
समीक्षात्मक प्रश्न | Q 8. | पृष्ठ ९४

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