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प्रश्न
माध्यमभाषया सरलार्थं लिखत।
रदनिका | एहि वत्स ! शकटिकया क्रीडाव:। |
दारक: | (सकरुणम्) रदनिके! किं मम एतया मृत्तिकाशकटिकया; तामेव सौवर्णशकटिकां देहि। |
रदनिका | (सनिर्वेदं नि:श्वस्य) जात! कुतोऽस्माकं सुवर्णव्यवहार:? तातस्य पुनरपि ऋद्ध्या सुवर्णशकटिकया क्रीडिष्यसि। (स्वगतम्) तद्यावद्विनोदयाम्येनम्। आर्यावसन्तसेनाया: समीपमुपसर्पिष्यामि। (उपसृत्य) आर्य ! प्रणमामि। |
लघु उत्तरीय
उत्तर १
English:
Radanika | O child, come, let us play with this cart. |
Child | (Crying) O Radankka, what is the use of this earthen cart to me? Give me the same golden cart. |
Radanika | (after sighing sadly), O boy, what association do we have, with gold? If your father becomes rich again, then you will play with the golden cart. (to herself) Let me entertain him, for some time. I shall approach Vasantasena. (Approaching) Madam,1 bow (down to you). |
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उत्तर २
हिंदी:
रदानिका | बेटी, आओ, इस कार से खेलें। |
बेटी | (विचलित), रदानिके! तुम मुझे यह मिट्टी की गाड़ी क्यों दे रहे हो? मुझे वही सोने की गाड़ी दे दो। |
रदानिका | (दर्द से आह भरते हुए) ओह बेटी! (अब) आपका सोने का लेन-देन कहां होगा (होगा)? जब तुम्हारे पिता पुनः धनवान हो जायेंगे तो तुम सोने के गाड़ी से खेलोगे। (स्वयं से) तब तक, मैं इसे खेलता हूं। (अन्यथा) मैं वसंतसेन जाता हूं। (वसन्तसेना के पास जाकर) तुम्हें मेरा नमस्कार है। |
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उत्तर ३
मराठी:
रदानिका | बाळा, चल, या गाडीशी खेळू या. |
बाळा | (व्याकूळ होऊन), रदनिके! का बरं मला ही मातीची गाडी (देत आहेस)? मला तीच सोन्याची गाडी दे. |
रदानिका | (दुःखाने नि:श्वास टाकत) अरे बाळा! (आता) आपले कोठे सोन्याचे व्यवहार (असणार)? जेव्हा तुझे वडील (पुन्हा) श्रीमंत होतील तेव्हा सोन्याच्या गाडीने खेळशील. (स्वत:ला) तोपर्यंत, मी याला खेळविते. (अन्यथा) मी वसंतसेनेकडे जाते. (वसंतसेनेकडे जाऊन) तुम्हाला माझा नमस्कार. |
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संस्कृतनाट्यस्तबकः।
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वैखानस: | (राजानम् अवरुध्य) राजन्! आश्रममृगोऽयं, न हन्तव्य:, न हन्तव्य:। आशु प्रतिसंहर सायकम्। राज्ञां शस्त्रम् आर्तत्राणाय भवति न तु अनागसि प्रहर्तुम्। |
दुष्यन्त | प्रतिसंहत एष: सायक:। (यथोक्तं करोति) |
वैखानस: | राजन्! समिदाहरणाय प्रस्थिता वयम्। एष खलु कण्वस्य कुलपते: अनुमालिनीतीरमाश्रमो दृश्यते। प्रविश्य प्रतिगृह्मताम् आतिथेय: सत्कार:। |
माध्यमभाषया सरलार्थं लिखत।
रदनिका | एहि वत्स ! शकटिकया क्रीडावः। |
दारकः | (सकरुणम्) रदनिके ! किं मम एतया मृक्तिकाशकटिकया; तामेव सौवर्णशकटिकांदेहि। |
रदनिका | (सनिर्वेदं निःश्वस्य) जात! कूतोऽस्माकं सुवर्णव्यवहारः ? तातस्य पुनरपि ऋद्धया सुवर्णशकटिकया करीडिष्यसि। |
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दुष्यन्तः | प्रतिसंहृत एष: सायक:। (यथोक्तं करोति) |
वैखानसः | राजन्! समिदाहरणाय प्रस्थिता वयम्। |