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प्रश्न
ऋतुचर्यापाठम् अधिकृत्य प्रत्येकम् ऋतौ किं किं करणीयम् किं किं च न करणीयम् इति मातृभाषया सुस्पष्टयत –
उत्तर
क्या करना चाहिए | क्या नहीं करना चाहिए |
1.हैमन्त ऋतु में गर्म जल से स्नान तथा गर्म जल का ही सेवन करना चाहिए। | 1. हेमन्त ऋतु में वातवर्धक खाना- पीना तेज वायु के प्रवाह को तथा सत्तू आदि खाना छोड़ देना चाहिए। |
2. शिशिर में गर्म घर में रहना चाहिए। |
2. शिशिर में वायु के सीधे प्रवाह से बचना चाहिए तथा कटु, तिक्त, शीतल, कसैले तथा वातवर्धक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। |
3. वसन्त करतु में वमनादि पउ्च- कर्म नहीं करने चाहिएँ। | 3. वसन्त काल में दिन में नहीं सोना चाहिए। अम्ल तथा मधुर रस के पदार्थ तथा स्निग्ध अन्न- पान त्याज्य है। |
4. 4. ग्रीष्म काल में घी, दूध तथा धान सहित अन्न का सेवन करना चाहिए तथा पुष्पमाला या मोती की माला धारण करनी चांहिए। | 4. ग्रीष्म ऋतु में व्यायाम तथा नमकीन अम्ल, कटु तथा उष्ण पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। |
5. वर्षा ऋतु में अम्ल-लवण-युक्त तथा स्निग्ध भोजन करना चाहिए तथा स्वच्छ एवं हल्के वस्त्र पहनने चाहिएँ। | 5. वर्षा ऋतु में भी दिन में शयन करना, व्यायाम करना तथा सत्तू आदि का सेवन नहीं करना। |
6. शरद् ऋतु में मधुर, तिक््त रस प्रधान लघु शीत तथा पित्त-नाशक अन्नपान का प्रयोग चाहिए | 6 शरद् ऋतु में वसा तैल, क्षार युक्त भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए तथा दिन में शयन भी नहीं करना चाहिए। |
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प्रकृति प्रत्ययं च योजयित्वा पदनिर्माणं कुरुत –
हेमन्त + ठक् = ______।
प्रकृति प्रत्ययं च योजयित्वा पदनिर्माणं कुरुत –
स्निम् + क्त = ______।
प्रकृति प्रत्ययं च योजयित्वा पदनिर्माणं कुरुत –
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प्रकृति प्रत्ययं च योजयित्वा पदनिर्माणं कुरुत –
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प्रकृति प्रत्ययं च योजयित्वा पदनिर्माणं कुरुत –
शरद् + अण् = ______।