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632.8 nm तरंगदैर्घ्य का एकवर्णी प्रकाश एक हीलियम-नियॉन लेसर के द्वारा उत्पन्न किया जाता है। उत्सर्जित शक्ति 9.42 mW है। (a) प्रकाश के किरण-पुंज में प्रत्येक फोटॉन की ऊर्जा तथा संवेग प्राप्त कीजिए। - Physics (भौतिक विज्ञान)

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प्रश्न

632.8 nm तरंगदैर्घ्य का एकवर्णी प्रकाश एक हीलियम-नियॉन लेसर के द्वारा उत्पन्न किया जाता है। उत्सर्जित शक्ति 9.42 mW है।

  1. प्रकाश के किरण-पुंज में प्रत्येक फोटॉन की ऊर्जा तथा संवेग प्राप्त कीजिए।
  2. इस किरण-पुंज के द्वारा विकिरित किसी लक्ष्य पर औसतन कितने फोटॉन प्रति सेकण्ड पहुँचेंगे? (यह मान लीजिए कि किरण-पुंज की अनुप्रस्थ काट एकसमान है जो लक्ष्य के क्षेत्रफल से कम है), तथा ।
  3. एक हाइड्रोजन परमाणु को फोटॉन के बराबर संवेग प्राप्त करने के लिए कितनी तेज चाल से चलना होगा?
संख्यात्मक

उत्तर

दिया है, λ = 632.8 nm = 6328 × 10-9m

शक्ति P = 9.42 mW = 9.42 × 10-3 W

(a) प्रत्येक फोटॉन की ऊर्जा E = `"hc"/lambda`

`= (6.63 xx 10^-34 xx 3 xx 10^8)/(632.8 xx 10^9)`

= 3.14 × 10-19 J

प्रत्येक फोटॉन का संवेग, p = `"hv"/"c" = "E"/"c" = (3.14 xx 10^-19)/(3 xx 10^8)`

= 1.05 × 10-27 kg ms-1 

(b) शक्ति P = nE, जिसमें n प्रति सेकण्ड लक्ष्य पर आपतित फोटॉनों की संख्या है।

n = `"P"/"E" = (9.42 xx 10^-3)/(3.14 xx 10^-19) = 3 xx 10^16` फोटॉनों/सेकण्ड

(c) यदि हाइड्रोजन का द्रव्यमान mH तथा वेग vH हो, तो हाइड्रोजन परमाणु का संवेग pH = mH vH

दिया है, PH = 1.05 × 10-27 kg ms-1 

∴ mH vH  = 1.05 × 10-27 

`=> "v"_"H" = (1.05 xx 10^-27)/"m"_"H"`

`= (1.05 xx 10^-27)/(1.66 xx 10^-27)`

= 0.63 ms-1

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इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 11: विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति - अभ्यास [पृष्ठ ४०९]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Physics [Hindi] Class 12
पाठ 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति
अभ्यास | Q 11.4 | पृष्ठ ४०९

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सीज़ियम धातु का कार्य-फलन 2,14eV है। जब 6 x 1014 Hz आवृत्ति का प्रकाश धातु-पृष्ठ पर आपतित होता है, इलेक्ट्रॉनों का प्रकाशिक उत्सर्जन होता है।

  1. उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की उच्चतम गतिज ऊर्जा
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आगे आने वाली दो संख्याओं का आकलन रोचक हो सकता है। पहली संख्या यह बताएगी कि रेडियो अभियान्त्रिक फोटॉन की अधिक चिन्ता क्यों नहीं करते। दूसरी संख्या आपको यह बताएगी कि हमारे नेत्र ‘फोटॉनों की गिनती क्यों नहीं कर सकते, भले | ही प्रकाश साफ-साफ संसूचन योग्य हो।

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