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प्रश्न
कल्याणकारी राज्य क्या है? ए. आर. देसाई कुछ देशों द्वारा किए गए दावों की आलोचना क्यों करते हैं?
उत्तर
- एक कल्याणकारी राज्य वह राज्य है जो विभिन्न परिप्रेक्ष्यों से संबंधित व्यक्तियों के कल्याण का कार्य करता है; जैसे-व्यक्तियों का राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, विकासात्मक आदि। ए०आर० देसाई की रुचि आधुनिक पूँजीवादी राज्य के महत्वपूर्ण विषय में था। देसाई ने कल्याणकारी राज्य की निम्नलिखित विशेषताएँ बताई हैं
- कल्याणकारी राज्य एक सकारात्मक राज्य होता है। इसका अर्थ है कि उदारवादी राजनीति के शास्त्रीय सिद्धांत की ‘Laissez Faire’ नीति के विपरीत, कानून और व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कल्याणकारी राज्य केवल न्यूनतम कार्य ही नहीं करता है।
- कल्याणकारी राज्य की अर्थव्यवस्था मिश्रित होती है। मिश्रित अर्थव्यवस्था का अर्थ है-ऐसी अर्थव्यवस्था जहाँ निजी पूँजीवादी कंपनियाँ और राज्य या सामूहिक कंपनियाँ दोनों साथ मिलकर कार्य करती हों।
- एक कल्याणकारी राज्य न तो पूँजीवादी बाज़ार को ही समाप्त करना चाहता है एवं न ही यह उद्योगों और दूसरे क्षेत्रों में जनता को निवेश करने से वंचित रखता है। कुल मिलाकर सरकारी क्षेत्र जरूरत की वस्तुओं तथा सामाजिक अधिसंरचना पर ध्यान देता है। इसकी तरफ निजी उद्योगों का वर्चस्व उपभोक्ता वस्तुओं पर कायम रहता है।
- देसाई कुछ ऐसे तरीकों का सुझाव देते हैं जिनके आधार पर कल्याणकारी राज्य द्वारा उठाये गए कदमों का परीक्षण किया जा सकता है। ये हैं।
(i) गरीबी, भेदभाव से मुक्ति एवं सभी नागरिकों की सुरक्षा – कल्याणकारी राज्य गरीबी, सामाजिक भेदभाव से मुक्त और अपने सभी नागरिकों की सुरक्षा की व्यवस्था करता है।
(ii) आय की समानता – कल्याणकारी राज्य आय संबंधी असमानता को दूर करने का प्रयास करता है। इसके लिए यह अमीरों की आय गरीबों में पुनः बाँटता है, धन के संग्रह को रोकता है।
(iii) समुदाय की वास्तविक जरूरतों की प्राथमिकता – कल्याणकारी राज्य अर्थव्यवस्था को इस प्रकार परिवर्तित करता है जहाँ समाज की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पूँजीवादियों को अधिक लाभ कमाने की मनोवृत्ति पर रोक लग जाय।
(iv) स्थायी विकास – कल्याणकारी राज्य स्थायी विकास के लिए आर्थिक मंदी और तेजी से मुक्त व्यवस्था सुनिश्चित करता है।
(v) रोजगार – यह सबके लिए रोजगार उपलब्ध कराता है।
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