मराठी

प्रभुता की कामना को मृगतृष्णा क्यों कहा गया है? - Hindi Course - A

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

प्रभुता की कामना को मृगतृष्णा क्यों कहा गया है?

एका वाक्यात उत्तर

उत्तर

प्रभुता की कामना को मृगतृष्णा इसलिए कहा गया है क्योंकि जिस तरह रेगिस्तान में भीषण गरमी में दूर चमकती रेत देखकर हिरन को पानी का भ्रम होता है, वह भागकर उसके पास जाता है, परंतु उसे निराश होना पड़ता है। उसी प्रकार प्रभुता या बड़प्पन का अहसास एक भ्रम है, जिसके पीछे व्यक्ति आजीवन भागता रहता है परंतु हासिल कुछ नहीं होता है।

shaalaa.com
छाया मत छूना
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 7: गिरिजाकुमार माथुर - छाया मत छूना - अतिरिक्त प्रश्न

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi - Kshitij Part 2 Class 10
पाठ 7 गिरिजाकुमार माथुर - छाया मत छूना
अतिरिक्त प्रश्न | Q 7

संबंधित प्रश्‍न

कवि ने कठिन यथार्थ के पूजन की बात क्यों कही है?


भाव स्पष्ट कीजिए -

प्रभुता का शरण-बिंब केवल मृगतृष्णा है,

हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है।


कविता में विशेषण के प्रयोग से शब्दों के अर्थ में विशेष प्रभाव पड़ता है, जैसे कठिन यथार्थ। कविता में आए ऐसे अन्य उदाहरण छाँटकर लिखिए और यह भी लिखिए कि इससे शब्दों के अर्थ में क्या विशिष्टता पैदा हुई?


'मृगतृष्णा' किसे कहते हैं, कविता में इसका प्रयोग किस अर्थ में हुआ है?


'बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि ले' यह भाव कविता की किस पंक्ति में झलकता है?


कविता में व्यक्त दुख के कारणों को स्पष्ट कीजिए।


‘जीवन में हैं सुरंग सुधियाँ सुहावनी’, से कवि का अभिप्राय जीवन की मधुर स्मृतियों से है। आपने अपने जीवन की कौन-कौन सी स्मृतियाँ संजो रखी हैं?


‘क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर?’ कवि का मानना है कि समय बीत जाने पर भी उपलब्धि मनुष्य को आनंद देती है। क्या आप ऐसा मानते हैं? तर्क सहित लिखिए।


कवि ‘छाया’ छूने से क्यों मना करता है?


कवि के जीवन की कौन-सी यादें उसे दुखी कर रही हैं?


‘भूली-सी एक छुअन बनता हर जीवित क्षण’ से कवि का क्या आशय है?


‘जितना ही दौड़ा तू उतना ही भरमाया’ के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?


‘हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है’ पंक्ति में कवि हमें किस यथार्थ एवं सत्य से अवगत कराना चाहता है?


कविता में यथार्थ स्वीकारने की बात क्यों कही गई है?


'छाया मत छूना’ कविता के माध्यम से कवि क्या संदेश देना चाहता है?
अथवा
‘छाया मत छूना’ कविता का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×