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Question
आशय स्पष्ट कीजिए -
प्रकाश बाहर नहीं है, उसे अंतर में खोजो। अंतर में बुझी उस ज्योति को जगाओ।
Solution
पहला मित्र एक साधु बन जाता है। वह लोगों को भीतर के अंधकार दूर करने और अपने अंदर प्रकाश ढूँढने के लिए कहता है। वह कहता है कि मनुष्य अपने अंदर के अँधेरे से डर जाता है और प्रकाश की तलाश में भटकता रहता है। वह कहता है कि प्रकाश हमारे अंदर ही होता है। अतः हमें चाहिए कि निराशा और दुख को हटाकार ज्ञान रूपी प्रकाश को ढूँढने की। वह ज्योति हमारे अविश्वास के कारण बुझ गई है। अतः हमें उसे जगाना चाहिए।
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