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आयनिक आबंध बनाने के लिए अनुकूल कारकों को लिखिए। - Chemistry (रसायन विज्ञान)

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Question

आयनिक आबंध बनाने के लिए अनुकूल कारकों को लिखिए।

Answer in Brief

Solution

आयनिक आबंध बनाने के लिए अनुकूल कारक (Favourable Factors for lonic Bond formation) - आयनिक आबंध बनाने के लिए निम्नलिखित कारक अनुकूल होते हैं-

१. आयनन एन्थैल्पी (Ionization enthalpy) – धनात्मक आयन या धनायन के बनने में किसी एक परमाणु को इलेक्ट्रॉनों का त्याग करना पड़ता है जिसके लिए आयनन एन्थैल्पी की आवश्यकता होती है। हम जानते हैं कि आयनन एन्थैल्पी ऊर्जा की वह मात्रा है जो किसी विलगित गैसीय परमाणु से बाह्यतम इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए आवश्यक होती है; अत: आयनन एन्थैल्पी की जितनी कम आवश्यकता होगी, धनायन का निर्माण उतना ही सरल होगा। s-ब्लॉक में उपस्थित क्षार धातुएँ एवं क्षारीय मृदा धातुएँ सामान्यत: धनायन बनाती हैं; क्योंकि इनकी आयनन एन्थैल्पी अपेक्षाकृत कम होती

२. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron gain enthalpy) – धनायनों के निर्माण में मुक्त हुए इलेक्ट्रॉन, आयनिक बंध के निर्माण में भाग ले रहे अन्य परमाणु द्वारा ग्रहण कर लिए जाते हैं। परमाणुओं की इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी पर निर्भर करती है। किसी विलगित गैसीय परमाणु द्वारा एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनने में जितनी ऊर्जा विमुक्त होती है, इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी कहलाती है। इस प्रकार स्पष्ट है कि इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी के अधिक ऋणात्मक होने पर ऋणायन का निर्माण सरल होगा। वर्ग 17 में उपस्थित हैलोजेनों की ऋणायन बनाने की प्रवृत्ति सर्वाधिक होती है, क्योंकि इनकी इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी अत्यंत उच्च ऋणात्मक होती है। ऑक्सीजन परिवार (वर्ग 16) के सदस्यों में भी ऋणायन बनाने की प्रवृत्ति होती है, परंतु अधिक सरलता से यह संभव नहीं होता; क्योंकि ऊर्जा की आवश्यकता द्विसंयोजी ऋणायन (O2−) बनाने के लिए होती है।

३. जालक ऊर्जा या एन्थैल्पी (Lattice energy or enthalpy) – आयनिक यौगिक क्रिस्टलीय ठोसों के रूप में होते हैं तथा आयनिक यौगिकों के क्रिस्टलों में धनायन तथा ऋणायन त्रिविमीय रूप में नियमित रूप से व्यवस्थित रहते हैं। चूँकि आयन आवेशित स्पीशीज़ हैं; अत: आयनों के आकर्षण में विमुक्त ऊर्जा जालक ऊर्जा या एन्थैल्पी कहलाती है। इसे इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है- विपरीत, आवेश वाले आयनों के संयोजन द्वारा जब क्रिस्टलीय ठोस का एक मोल प्राप्त होता है, तब विमुक्त ऊर्जा जालक ऊर्जा या एन्थैल्पी कहलाती है। इसे ‘U’ द्वारा व्यक्त किया जाता है।

\[\ce{A^+_{ (g)} + B^-_{ (g)} A^+B^-_{ (s)} + {जालक ऊर्जा (U)}}\]

इस प्रकार स्पष्ट है कि जालक ऊर्जा का परिमाण अक्कि होने पर आयनिक बंध अथवा आयनिक यौगिक का स्थायित्व अधिक होगा।

निष्कर्षत: यदि जालक ऊर्जा का परिमाण तथा ऋणात्मक इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी आवश्यक आयनन एन्थैल्पी की तुलना में अधिक होंगे, तब एक स्थायी रासायनिक बंध प्राप्त होगा। इनके कम होने पर बंध का विरचन नहीं होगा।

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आयनिक या वैद्युत् संयोजी आबंध
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Chapter 4: रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना - अभ्यास [Page 133]

APPEARS IN

NCERT Chemistry - Part 1 and 2 [Hindi] Class 11
Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना
अभ्यास | Q 4.6 | Page 133
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