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''मानव संबंधों से परे साहित्य नहीं है।'' इस कथन की समीक्षा कीजिए। - Hindi (Elective)

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Question

''मानव संबंधों से परे साहित्य नहीं है।'' इस कथन की समीक्षा कीजिए।

Long Answer

Solution

एक कवि या लेखक मानव है। अतः मानव संबंधों से वह स्वयं घुला-मिला होता है। ऐसा कोई साहित्यकार नहीं है, जो मानव संबंधों से युक्त न हो। मनुष्य के जीवन का आधार ही ये मानव संबंध हैं। कोई किसी का मित्र है, तो कोई माता-पिता, कोई भाई-बहन, पुत्र-पुत्री इत्यादि ही मानव संबंधों की एक श्रृंखला है। अतः इस कारण साहित्य की रचना करने वाला जब साहित्य का निर्माण करता है, तो साहित्य से इन्हें अलग करना संभव नहीं है। एक कवि या लेखक रचना में इन मानव संबंधों के बारे में तभी उल्लेख करता है, जब वह आहत होता है या प्रसन्न होता है। उसके इन संबंधों की छाया उसके साहित्य में स्वतः ही पड़ जाती है। इस तरह से वह साहित्य के माध्यम से इनका सुंदर मूल्यांकन करता है। अतः कवि या लेखक के संतोष तथा असंतोष का आधार ही हम मानव संबंध को मानते हैं। अतः साहित्य का सुर्जन करते वक्त मानव संबंधों का होना आवश्यक हो जाता है। अतः साहित्य मानव संबंधों से परे नहीं है बल्कि उससे जुड़ा हुआ है।
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यथास्मै रोचते विश्वम्
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Chapter 2.08: रामविलास शर्मा (यथास्मै रोचते विश्वम्) - प्रश्न-अभ्यास [Page 145]

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NCERT Hindi - Antara Class 12
Chapter 2.08 रामविलास शर्मा (यथास्मै रोचते विश्वम्)
प्रश्न-अभ्यास | Q 5. | Page 145

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