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Question
Solution
प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ रामविलास शर्मा द्वारा लिखित निबंध 'यशास्मै रोचते विश्वम्' से अवतरित है। प्रस्तुत पंक्ति में कवि के गुणों पर प्रकाश डाला गया है।
व्याख्या- लेखक के अनुसार सृष्टि की रचना करने वाला कवि गंभीर यथार्थवादी होता है। अर्थात वह यथार्थ को कल्पना से नहीं जोड़ता है। वह उसे गंभीरता से लेता है और अपनी रचनाओं में पूरी गंभीरता से उस यथार्थ को दर्शाता है। इस प्रकार के साहित्यकार की विशेषता होती है कि वह अपना कर्तव्य पूरी गंभीरता से निभाता है। उसके पाँव यथार्थ पर पूर्णरूप से टिके होते हैं। अर्थात वह सच्चाई से पूरी तरह से जुड़ा होता है। वह जानता है कि वर्तमान में क्या चल रहा है? वह जानता है कि वर्तमान का यह सत्य कैसे भविष्य की क्षितिज पर दिखाई देखा? अर्थात वह ऐसे साहित्य की रचना करता है, जो वर्तमान की सत्य घटनाओं पर आधारित होता है और आने वाले भविष्य की संरचना को दर्शाता है। उसकी रचना में सत्य का उद्घाटन और उससे भविष्य पर पड़ने वाले प्रभाव का सही वर्णन होता है।
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