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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-तब तौ छबि पीवत जीवत हे, अब सोचन लोचन जात जरे। - Hindi (Elective)

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Question

निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
तब तौ छबि पीवत जीवत हे, अब सोचन लोचन जात जरे।

Short Note

Solution

तब तौ छबि पीवत जीवत हे, अब सोचन लोचन जात जरे। – प्रस्तुत पंक्ति का आशय है कि संयोगावस्था में होने के कारण प्रेयसी कवि के पास ही थी। अतः उसे देखकर ही वह सुख पाता था और उसके रूप को देखकर आनंद से भर जाता था। यही उसके जीने का कारण भी था। परन्तु अब वियोग की अवस्था है। उसके नेत्र पुरानी स्थिति के बारे में सोच-सोचकर जलने लगते हैं। अर्थात कवि के नयनों में अब भी अपनी प्रेयसी से मिलन की आस बंधी हुई है।

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सवैया
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Chapter 1.11: घनानंद (कवित्त/सवैया) - प्रश्न-अभ्यास [Page 68]

APPEARS IN

NCERT Hindi - Antara Class 12
Chapter 1.11 घनानंद (कवित्त/सवैया)
प्रश्न-अभ्यास | Q 7. (ग) | Page 68

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संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए-
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