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Question
विद्युत धारा निर्मित करने के लिए किस उपकरण का उपयोग किया जाता है? आकृतिसहित वर्णन कीजिए।
Options
विद्युत चलित्र
गैल्वनोमीटर
विद्युत जनित्र
वोल्टमीटर
Solution
विद्युत जनित्र।
रचना : आकृति में दिष्ट विद्युत धारा जनित्र (DC, generator या डायनेमो) की रचना दिखाई गई है।
- तांबे के तार की आयताकार कुंडली : इसमें एक आयताकार टुकड़े ABCD पर, विद्युतरोधी आवरणयुक्त ताँबे के तार के असंख्य फेरे लिपटे होते हैं।
- शक्तिशाली चुंबक : अत्यधिक प्रभावकारी चुंबकीय क्षेत्र प्राप्त करने के लिए एक शक्तिशाली चुंबक के दोनों ध्रुवों (N तथा S) के ठीक बीच में कुंडली रखी रहती है।
- अर्धवृत्ताकार विभक्त दिक्परिवर्तक :आर्मेचर कुंडली के दोनों स्वतंत्र सिरों को पीतल के दो वलयों R1 तथा R2 से जोड़ देते है |वलय धूरी से जुड़े होते हैं। वलयों तथा धूरी के मध्य विद्युतरोधी पदार्थ होता है।
- ब्रश : अर्धवृत्ताकार दिक्परिवर्तक को दोनों ओर से दबाकर उन्हें अच्छी तरह जकड़कर रखने के लिए कार्बन से बने दो ब्रशों B1 तथा B2 का उपयोग करते है |
- बल्ब : जनित्र के आउटपुट को ब्रशों के मध्य जोड़े गए विद्युत बल्ब द्वारा दर्शाया जाता है। विद्युत परिपथ में धारा प्रवाहित होने पर बल्ब प्रकाशित होता है। बल्ब की जगह विद्युतधारा की दिशा दर्शाने के लिए गैल्वनोमीटर को जोड़ा जा सकता है।
कार्य : धूरी को बाहर से किसी यंत्र द्वारा घूमाया जाता है। दिष्ट विद्युतधारा जनित्र की कुंडली जब चुंबकीय क्षेत्र में अपने ही चारों ओर घूमती है, तब विद्युत चुंबकीय प्रवर्तन के कारण कुंडली में विद्युत विभवांतर उत्पन्न होता है। फलतः कुंडली में प्रेरित विद्युतधारा उत्पन्न होती है। प्रकाशमान बल्ब अथवा गैल्वनोमीटर (galvanometer) यह विद्युतधारा दर्शाता है। विद्युतधारा की दिशा कुंडली के परिवलन की दिशा पर निर्भर होती है।
दिष्ट विद्युतधारा जनित्र (DC जनरेटर)
ABCD : ताँबे के तार की आयताकार कुंडली, N, S : चुंबक का ध्रुव, R1, R2 : धातु के वलय, B1, B2 : कार्बन के ब्रश, B : बल्ब
इस प्रकार के जनित्र में कार्बन का एक ब्रश निरंतर आर्मेचर की ऊर्ध्व दिशा में कार्यरत भुजा के संपर्क में होता है, जबकि दूसरा ब्रश, निरंतर आर्मेचर की अधोदिशा में कार्यरत भुजा के संपर्क में होता है। परिणामस्वरूप जब तक कुंडली चुंबकीय क्षेत्र में घूमती रहती है, तब तक विद्युत परिपथ में एक ही दिशा में विद्युतधारा प्रवाहित होती रहती है। कुंडली जब तक चुंबकीय क्षेत्र में घूमती रहती है, तब तक विद्युतधारा का निर्माण होता रहता है।