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Write a composition in approximately 400 words in Hindi of the topic given below: नीचे दिए गए विषय पर हिन्दी में निबन्ध लिखिए जो लगभग 400 शब्दों से कम न हो।  पहले अपने गली-मोहल्ले की दुकानों से - Hindi (Indian Languages)

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Question

Write a composition in approximately 400 words in Hindi of the topic given below:

नीचे दिए गए विषय पर हिन्दी में निबन्ध लिखिए जो लगभग 400 शब्दों से कम न हो। 

पहले अपने गली-मोहल्ले की दुकानों से खरीदारी की जाती थी। पर अब 'ऑनलाइन' खरीदारी का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। इस परिवर्तन का समाज पर क्या प्रभाव पड़ रहा हैं? समझाकर लिखिए।

Long Answer

Solution

पहले के समय में हमारे गली-मोहल्ले की दुकानों से खरीदारी करना न केवल एक सामान्य आदत थी बल्कि एक सामाजिक गतिविधि भी थी। इन दुकानों में खरीदारी करते समय न केवल हमें सामान मिलता था, बल्कि हम अपने पड़ोसियों और दुकानदारों से बातचीत कर सामाजिक संपर्क भी बनाए रखते थे। इस प्रक्रिया में हमें अपने समाज की नब्ज को समझने और एक-दूसरे की सहायता करने का मौका मिलता था। लेकिन आज के डिजिटल युग में ऑनलाइन खरीदारी का प्रचलन तेजी से बढ़ता जा रहा है और इस परिवर्तन का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है।

ऑनलाइन खरीदारी ने लोगों के लिए कई सुविधाएँ प्रस्तुत की हैं। अब घर बैठे ही हम किसी भी समय अपनी आवश्यकता की वस्तुएँ मंगा सकते हैं। इससे समय और ऊर्जा की बचत होती है और बाजार की भीड़-भाड़ से बचने का अवसर मिलता है। विशेष रूप से व्यस्त जीवनशैली वाले लोगों के लिए यह एक वरदान साबित हुआ है। ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर विभिन्न विकल्पों को देखकर हम अपनी पसंद और बजट के अनुसार खरीदारी कर सकते हैं, और अनेक प्रकार के डिस्काउंट और ऑफर्स का लाभ उठा सकते हैं।हालांकि, इस सुविधा ने स्थानीय व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। छोटे दुकानदारों और गली-मोहल्ले की दुकानों को भारी नुकसान हुआ है। ऑनलाइन शॉपिंग के कारण उनकी बिक्री में कमी आई है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। इन दुकानों के बंद होने से स्थानीय रोजगार भी प्रभावित हुए हैं और कई लोगों को अपनी नौकरियाँ खोनी पड़ी हैं।

सामाजिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो ऑनलाइन खरीदारी ने लोगों के बीच के व्यक्तिगत संपर्क को कम कर दिया है। पहले जो सामाजिक संपर्क और संबंध स्थानीय दुकानों के माध्यम से बनते थे, वे अब धीरे-धीरे समाप्त हो रहे हैं। गली-मोहल्ले की दुकानों पर होने वाली अनौपचारिक बातचीत और मेलजोल अब कम हो गए हैं, जिससे समाज में एक प्रकार की अलगाव की भावना बढ़ रही है।

पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी ऑनलाइन खरीदारी के नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलते हैं। ऑनलाइन शॉपिंग के कारण पैकेजिंग मटेरियल की खपत बढ़ गई है, जिससे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। प्लास्टिक और अन्य नॉन-बायोडिग्रेडेबल मटेरियल का उपयोग बढ़ गया है, जिससे कचरे की मात्रा भी बढ़ गई है। हालांकि, यह भी सच है कि ऑनलाइन खरीदारी ने नए रोजगार अवसर भी पैदा किए हैं। डिलीवरी बॉय, कस्टमर सपोर्ट, वेयरहाउस मैनेजमेंट जैसे नए रोजगार उत्पन्न हुए हैं। इससे एक नए प्रकार की अर्थव्यवस्था का निर्माण हुआ है जो डिजिटल माध्यमों पर आधारित है।

निष्कर्षतः, ऑनलाइन खरीदारी ने हमारे जीवन को सुविधाजनक और सरल बनाया है, लेकिन इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभावों को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। यह आवश्यक है कि हम इस परिवर्तन को संतुलित दृष्टिकोण से देखें और स्थानीय व्यापार और सामाजिक संपर्क को बनाए रखने के प्रयास करें। इससे हम एक समृद्ध और संतुलित समाज का निर्माण कर सकेंगे।

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उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
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