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NCERT solutions for Hindi - Aaroh Class 12 chapter 5 - गजानन माधव मुक्तिबोध (सहर्ष स्वीकारा है) [Latest edition]

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Chapters

काव्य खंड

    1: हरिवंश राय बच्चन (आत्मपरिचय, एक गीत)

    2: आलोक धन्वा (पतंग)

    3: कुँवर नारायण (कविता के बहाने, बात सीधी थी पर)

    4: रघुवीर सहाय (कैमरे में बंद अपाहिज)

▶ 5: गजानन माधव मुक्तिबोध (सहर्ष स्वीकारा है)

    6: शमशेर बहादुर सिंह (उषा)

    7: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' (बादल राग)

    8: तुलसीदास (कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप)

    9: फ़िराक गोरखपुरी (रुबाइयाँ, गज़ल)

    10: उमाशंकर जोशी (छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख)

गद्य खंड

    11: महादेवी वर्मा (भक्तिन)

    12: जैनेन्द्र कुमार (बाज़ार दर्शन)

    13: धर्मवीर भारती (काले मेघा पानी दे)

    14: फणीश्वर नाथ रेणु (पहलवान की ढोलक)

    15: विष्णु खरे (चार्ली चैप्लिन यानी हम सब)

    16: रज़िया सज्जाद ज़हीर (नमक)

    17: हजारी प्रसाद द्विदेदी (शिरीष के फूल)

    18: बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर (श्रम विभाजन और जाति-प्रथा, मेरी कल्पना का आदर्श समाज)

NCERT solutions for Hindi - Aaroh Class 12 chapter 5 - गजानन माधव मुक्तिबोध (सहर्ष स्वीकारा है) - Shaalaa.com
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Solutions for Chapter 5: गजानन माधव मुक्तिबोध (सहर्ष स्वीकारा है)

Below listed, you can find solutions for Chapter 5 of CBSE NCERT for Hindi - Aaroh Class 12.


अभ्यास
अभ्यास [Pages 32 - 33]

NCERT solutions for Hindi - Aaroh Class 12 5 गजानन माधव मुक्तिबोध (सहर्ष स्वीकारा है) अभ्यास [Pages 32 - 33]

कविता के साथ

अभ्यास | Q 1. | Page 32

टिप्पणी कीजिएः गरबीली गरीबी, भीतर की सरिता, बहलाती सहलाती आत्मीयता, ममता के बादल।

अभ्यास | Q 2. | Page 32

इस कविता में और भी टिप्पणी-योग्य पद-प्रयोग हैं। ऐसे किसी एक प्रयोग का अपनी ओर से उल्लेख कर उस पर टिप्पणी करें।

अभ्यास | Q 3. | Page 32

व्याख्या कीजिएः
जाने क्या रिश्ता है, जाने क्या नाता है
जितना भी उँड़ेलता हूँ, भर-भर फिर आता है
दिल में क्या झरना है?
मीठे पानी का सोता है
भीतर वह, ऊपर तुम
मुसकाता चाँद ज्यों धरती पर रात-भर
मुझ पर त्यों तुम्हारा ही खिलता वह चेहरा है!

उपर्युक्त पंक्तियों की व्याख्या करते हुए यह बताइए कि यहाँ चाँद की तरह आत्मा पर झुका चेहरा भूलकर अंधकार-अमावस्या में नहाने की बात क्यों की गई है?

अभ्यास | Q 4. | Page 33

तुम्हें भूल जाने की
दक्षिण ध्रुवी अंधकार-अमावस्या
शरीर पर, चेहरे पर, अंतर में पा लूँ मैं
झेलूँ मैं, उसी में नहा लूँ मैं
इसलिए कि तुमसे ही परिवेष्टित आच्छादित
रहने का रमणीय यह उजेला अब
सहा नहीं जाता है।

  1. यहाँ अंधकार-अमावस्या के लिए क्या विशेषण इस्तेमाल किया गया है उससे विशेष्य में क्या अर्थ जुड़ता है?
  2. कवि ने व्यक्तिगत संदर्भ में किस स्थिति को अमावस्या कहा है?
  3. इस स्थिति से ठीक विपरीत ठहरने वाली कौन-सी स्थिति कविता में व्यक्त हुई है? इस वैपरीत्य को व्यक्त करने वाले शब्द का व्याख्यापूर्वक उल्लेख करें।
  4. कवि अपने संबोध्य (जिसको कविता संबंधित है कविता का 'तुम') को पूरी तरह भूल जाना चाहता है, इस बात को प्रभावी तरीके से व्यक्त करने के लिए क्या युक्ति अपनाई है? रेखांकित अंशों को ध्यान में रखकर उत्तर दें।
अभ्यास | Q 5. | Page 33

बहलाती सहलाती आत्मीयता बरदाश्त नहीं होती है- और कविता के शीर्षक सहर्ष स्वीकारा है में आप कैसे अंतर्विरोध पाते हैं। चर्चा कीजिए।

कविता के आसपास

अभ्यास | Q 1. | Page 33
अतिशय मोह भी क्या त्रास का कारक है? माँ का दूध छूटने का कष्ट जैसे एक ज़रूरी कष्ट है, वैसे ही कुछ और ज़रूरी कष्टों की सूची बनाएँ।
अभ्यास | Q 2. | Page 33

प्रेरणा शब्द पर सोचिए और उसके महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए जीवन के वे प्रसंग याद कीजिए जब माता-पिता, दीदी-भैया, शिक्षक या कोई महापुरुष/महानारी आपके अँधेरे क्षणों में प्रकाश भर गए।

अभ्यास | Q 3. | Page 33

'भय' शब्द पर सोचिए। सोचिए कि मन में किन-किन चीज़ों का भय बैठा है? उससे निबटने के लिए आप क्या करते हैं और कवि की मनःस्थिति से अपनी मनःस्थिति की तुलना कीजिए।

Solutions for 5: गजानन माधव मुक्तिबोध (सहर्ष स्वीकारा है)

अभ्यास
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