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प्रश्न
दो चक्रिकाएँ जिनके अपने-अपने अक्षों (चक्रिका के अभिलंबवत् तथा चक्रिका के केंद्र से गुजरने वाले) के परितः जड़त्व-आघूर्ण I1 तथा I2 हैं और जो ω1 तथा ω2 कोणीय चालों से घूर्णन कर रही हैं, को उनके घूर्णन अक्ष संपाती करके आमने-सामने लाया जाता है।
- इस दो चक्रिका निकाय की कोणीय चाल क्या है?
- यह दर्शाइए कि इस संयोजित निकाय की गतिज ऊर्जा दोनों चक्रिकाओं की आरंभिक गतिज ऊर्जाओं के योग से कम है। ऊर्जा में हुई इस हानि की आप कैसे व्याख्या करेंगे? ω1 ≠ ω2 लीजिए।
उत्तर
(a) माना संपर्क में आने के पश्चात् दोनों चक्रिकाएँ उभयनिष्ठ कोणीय वेग ω से घूर्णन करती हैं।
∵ निकाय पर बाह्य बल आघूर्ण शून्य है, अतः निकाय का कोणीय संवेग संरक्षित रहेगा।
∴ `"I"_1"ω"_1 + "I"_2"ω"_2 = ("I"_1 + "I"_2) "ω"`
∵ निकाय की नई कोणीय चाल `"ω" = ("I"_1"ω"_1 + "I"_2"ω"_2)/("I"_1 + "I"_2)`
(b) निकाय की नई गतिज ऊर्जा
`"K"_2 = 1/2 ("I"_1 + "I"_2) "ω"^2`
= `1/2 ("I"_1 + "I"_2) (("I"_1"ω"_1 + "I"_2"ω"_2)/("I"_1 + "I"_2))^2`
= `1/2 ("I"_1"ω"_1 + "I"_2"ω"_2)^2/(("I"_1 + "I"_2))`
जबकि प्रारंभिक गतिज ऊर्जा
`"K"_1 = 1/2 "I"_1"ω"_1^2 + 1/2 "I"^2"ω"_2^2`
∴ ΔK =`"K"_1 - "K"_2`
= `1/2 ("I"_1"ω"_1^2 + "I"^2"ω"_2^2) - 1/2 [("I"_1"ω"_1 + "I"_2"ω"_2)^2/(("I"_1 + "I"_2))]`
= `1/(2("I"_1 + "I"_2)) ["I"_1^2"ω"_1^2 + "I"_2^2"ω"_2^2 + "I"_1"I"_2("ω"_1^2 + "ω"_2^2) - "I"_1^2"ω"_1^2 - "I"_2^2"ω"_2^2 - 2"I"_1"I"_2"ω"_1"ω"_2]`
= `("I"_1"I"_2)/(2("I"_1 + "I"_2))["ω"_1^2 + "ω"_2^2 - 2"ω"_1"ω"_2]`
= `("I"_1"I"_2)/(2("I"_1 + "I"_2))("ω"_1 - "ω"_2)^2 = "एक धनात्मक राशि"`
∵ K1 - K2 = धनात्मक राशि; अतः K1 > K2
अर्थात् संयोजित निकाय की गतिज ऊर्जा चक्रिकाओं की आरंभिक गतिज ऊर्जाओं के योग से कम है।
गतिज ऊर्जा में हानि, चक्रिकाओं की संपर्कित सतहों के बीच घर्षण बल के कारण हुई है।
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