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प्रश्न
समांतर अक्षों के प्रमेय की उपपत्ति करें। [संकेत : यदि द्रव्यमान केन्द्र को मूलबिन्दु ले लिया जाए ∑mi ri = 0]
उत्तर
समांतर अक्षों की प्रमेय -
इस प्रमेय के अनुसार, “किसी पिण्ड का किसी अक्ष के परितः जड़त्व-आघूर्ण I, उस पिण्ड के द्रव्यमान केन्द्र से होकर जाने वाली समान्तर अक्ष के परितः जड़त्व-आघूर्ण Icm तथा पिण्ड के द्रव्यमान M व दोनों समान्तर अक्षों के बीच की लम्बे दूरी d के वर्ग के गुणनफल के योग के बराबर होता है।”
अर्थात् I = Icm + Md2
उपपत्ति – माना पिण्ड के भीतर स्थित m द्रव्यमान के किसी कण की दी गई अक्ष AB से दूरी r है तथा द्रव्यमान केन्द्र C से गुजरने वाली AB के समान्तर अक्ष EF से कण की दूरी a है। माना दोनों अक्षों AB व EF के बीच की लम्बवत् दूरी 4 है। तब चित्र से, r = a + d
अब अक्ष AB के परितः पिण्ड का जड़त्व - आघूर्ण
`"I" = ∑"mr"^2 = ∑"m" ("a" + "d")^2`
= ` ∑"m" ("a"^2 + "d"^2 + 2 "ad")`
= `∑ "ma"^2 + ∑"md"^2 + 2∑"mad"`
= `∑"ma"^2 + "d"^2∑"m" + 2 "d" ∑"ma"` ...(1)
लेकिन द्रव्यमान केंद्र से जाने वाली किसी अक्ष के परितः पिण्ड के कणों के द्रव्यमानों के आघुर्णों का योग शून्य होता है, अर्थात,
∑ma = 0
अतः समीकरण (1) से,
`"I" = ∑"ma"^2 + "d"^2∑"m" = "I"_"cm" + "Md"^2`
जहाँ ∑m = M पिण्ड का संपूर्ण द्रव्यमान है तथा `"I"_"cm" = ∑"ma"^2` द्रव्यमान केंद्र C से गुजरने वाली अक्ष CD के परितः पिण्ड का जड़त्व - आघूर्ण है।
अतः `"I" = "I"_"cm" + "Md"^2`
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