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साहित्य के 'पांचजन्य' से लेखक का क्या तात्पर्य है? 'साहित्य का पांचजन्य' मनुष्य को क्या प्रेरणा देता है? - Hindi (Elective)

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प्रश्न

साहित्य के 'पांचजन्य' से लेखक का क्या तात्पर्य है? 'साहित्य का पांचजन्य' मनुष्य को क्या प्रेरणा देता है?

थोडक्यात उत्तर

उत्तर

'पांचजन्य' कृष्ण के शंक का नाम था। इसकी विशेषता थी कि इसे फूंका एक स्थान से जाता था और ध्वनियाँ पाँच स्थानों से बाहर आती थी। अतः लेखक ने साहित्य के पांचजन्य कहकर साहित्य की विशेषता का वर्णन किया है। यह पांचजन्य शंख के समान है, जो जीवन से हार चुके व्यक्ति को अपने नाद से जागृत करता है। इसके अतिरिक्त यह मनुष्य को जीवन रूपी युद्धभूमि में लड़ने के लिए प्रेरित करता है। साहित्य के पांचजन्य ने मनुष्य के मन में व्याप्त दुख, निराशा, हार इत्यादि भावों को उखाड़ फेंका है। यह आज से ही नहीं प्राचीनकाल से मनुष्य की रक्षा कर रहा है। यह मनुष्य को कर्म करने के लिए उत्साहित करता है। जो लोग भाग्य के भरोसे रहते हैं साहित्य का पांचजन्य उनका उपहास उड़ता है।
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यथास्मै रोचते विश्वम्
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पाठ 2.08: रामविलास शर्मा (यथास्मै रोचते विश्वम्) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ १४५]

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एनसीईआरटी Hindi - Antara Class 12
पाठ 2.08 रामविलास शर्मा (यथास्मै रोचते विश्वम्)
प्रश्न-अभ्यास | Q 7. | पृष्ठ १४५

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