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“भ्रान्तो बालः” इति कथायाः सारांशं हिन्दीभाषया आङग्लभाषया वा लिखत। - Sanskrit

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Question

“भ्रान्तो बालः” इति कथायाः सारांशं हिन्दीभाषया आङग्लभाषया वा लिखत।

Answer in Brief

Solution

हिन्दीभाषया - एक भ्रान्त बालक पाठशाला, जाने के समय खेलने के लिए चल पड़ा। उसने अपने मित्रों से भी खेलने आने को कहा किन्तु सब विद्यालय जाने की जल्दी में थे तथा किसी ने भी उसकी बात न मानी। उपवन में जाकर सबसे पहले उसने भौरे से खेलने को कहा किन्तु उसने पराग सञ्चित करने में अपनी। व्यस्तता बताई। तब उसने चिड़े को स्वादिष्ट खाद्य वस्तुएँ देने का लालच देकर खेलने को कहा किन्तु उसने भी घोंसला बनाने के कार्य में अपनी व्यस्तता बताकर खेलने से इन्कार कर दिया। तत्पश्चात् उसने कुत्ते से खेलने को कहा। कुत्ते ने भी रक्षानियोग के कारण अपनी व्यस्तता प्रकट की।

इस प्रकार नष्ट मनोरथ वाले उस बालक ने अन्त में यह समझ लिया कि समय नष्ट करना उचित नहीं। सभी अपने-अपने कार्यों में व्यस्त हैं, अतः उसे भी अपना कर्तव्य (विद्याप्राप्ति) पूरा करना चाहिए। तभी से वह विद्याप्राप्ति में जुट गया। वह शीघ्र विद्यालय चला गया।

आङग्लभाषया - Once a boy became astray and went to play at the time of going to school. He asked his friends also to accompany him but they all were in hurry to go to school. So, no one fulfilled his desire. Then he went to the garden lonely and asked the black-bee first to play with him but the black bee said that he is busy collecting the nectar of the flowers. Then he asked the male sparrow if he will give tasty eatables to him if he plays with him. But he also said that he was busy making his nest, so he had no time to play. Then he asked the dog to play with him. But he also refused to play as he was busy performing his duty of watching the house.

Thus, the boy was very disappointed. Now he understood that it is not advisable to waste time. Everyone is busy in performing his duty. So, he should also fulfill his duty by obtaining an education. Since that day, he engaged himself seriously with obtaining an education. He went to school quickly.

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भ्रान्तो बाल:
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Chapter 6: भ्रान्तो बालः - अभ्यासः [Page 42]

APPEARS IN

NCERT Sanskrit - Shemushi Class 9
Chapter 6 भ्रान्तो बालः
अभ्यासः | Q 4 | Page 42

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बालः कदा क्रीडितुं निर्जगाम?


बालस्य मित्राणि किमर्थं त्वरमाणा बभूवुः?


कः तंद्रालुः भवति?


चटकाः कया तृणशालकादिकम् अददाती?


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निम्नलिखितस्य श्लोकस्य भावार्थं हिन्दीभाषया आङ्ग्लभाषया वा लिखत –
यो मां पुत्रप्रीत्या पोषयति स्वामिनो गृहे तस्य। 
रक्षानियोगकरणान्न मया भ्रष्टव्यमीषदपि।।


स्थूलपदान्यधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत

चटकः स्वकर्माणि व्यग्रः आसीत्।


 कुक्कुरः मानुषाणां मित्रम् अस्ति।


स्थूलपदान्यधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत –

महती वैदुषीं लब्धवान्।


स्थूलपदान्यधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत –

रक्षानियोगकरणात् मया न भ्रष्टव्यम् इति।


‘क’ स्तम्भे समस्तपदानि ‘ख’ स्तम्भे च तेषां विग्रहः दत्तानि, तानि यथासमक्षं लिखत –

‘क’ स्तम्भ  ख’ स्तम्भ
(क) दृष्टिपथम्  (1) पुष्पाणाम् उद्यानम्
(ख) पुस्तकदासाः (2)  विद्यायाः व्यसनी
(ग)  विद्याव्यसनी (3) दृष्टेः पन्थाः
(घ) पुष्पोद्यानम् (4)  पुस्तकानां दासाः

अधोलिखितेषु पदयुग्मेषु एकं विशेष्यपदम् अपरञ्च विशेषणपदम्। विशेषणपदम् विशेष्यपदं च पृथक्-पृथक् चित्वा लिखत –

  विशेषणम् विशेष्यम्
खिन्नः बाल: ______ ______

अधोलिखितेषु पदयुग्मेषु एकं विशेष्यपदम् अपरञ्च विशेषणपदम्। विशेषणपदम् विशेष्यपदं च पृथक्-पृथक् चित्वा लिखत –

  विशेषणम् विशेष्यम्
पलायमानं श्वानम्  ______ ______

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