Advertisements
Advertisements
Question
समासविग्रहं कुरुत
समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
पन्नगभूषण: | ______ | ______ |
Solution
समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
पन्नगभूषण: | पन्नगः भूषणं यस्य सः | बह्रीहिः |
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
मञ्जूषातः समानार्थकशब्दान् विरुद्धार्थकशब्दान् चित्वा लिखत।
राजा = ______
उत्तरपदं लिखत।
मृगेणोक्तम् = मृगेण + ______ |
सूचनानुसारं कृती: कुरुत ।
त्वं पादान्स्तब्धीकृत्य तिष्ठ । (‘त्वं’ स्थाने ‘भवान्’ योजयत ।)
समासविग्रहं कुरुत-
समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
धनधान्यपुष्पफलानि | ______ | ______ |
समासविग्रहं कुरुत
समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
क्षेत्रपति: | ______ | ______ |
समासविग्रहं कुरुत
समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
सकोपम् | ______ | _____ |
सूचनानुसारं कृती: कुरुत ।
त्वं किम् इच्छसि ? (त्वम्’ इत्यस्य स्थाने ‘भवान्’ इति योजयत ।)
सूचनानुसार कृती: कुरुत।
त्वया किं दृष्टम्? (वाच्य परिवर्तनं कुरुत।)
नामतालिकां पूरयत ।
ए.व. | द्विव. | ब.व. | विभक्तिः |
______ | ब्रह्मभ्याम् | ______ | तृतीया |
क्रियापदतालिकां पूरयत
ए.व. | द्विव. | ब.व | पुरुष: | लकार : |
मुज्चानि | ______ | ______ | उत्तमः | लोट् |
समासविग्रहं कुरुत
समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
पूजार्थम् | ______ | _____ |
समासविग्रहं कुरुत
समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
पुस्तकपठनम् | ______ | ______ |
समासविग्रहं कुरुत
समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
जपाकुसुमम् | ______ | _____ |
तालिकां पूरयत
धातवः | अर्थ : | लकार : | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
ब्रू (२ उ.) | वदति | लङ् | ______ | अब्रूताम् | अब्रुवन् |
सन्धिविग्रहं कुरुत ।
अद्ययावद्धि ।
प्रश्ननिर्माणं कुरुत।
धेनुः वास्तविकी एव ।
नाम-तालिकापूर्ति कुरुत
एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्तिः |
कर्मणा | ______ | ______ | तृतीया |
सूचनानुसारं कृती: कुरुत।
यदा त्वं स्मरिष्यसि तदा एव त्वत्समीपमागमिष्यामि। (लकारं लिखत।)
सपासविग्रहं कुरुत ।
समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
पाषाणखण्डा : | ______ | ______ |
समासविग्रहं कुरुत
समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
वनस्पतिगतः | ______ | ______ |
सूचनानुसारं कृती: कुरुत ।
अपि भवती संस्कृतं पाठयति? (‘भवती’ स्थाने ‘त्वं’ योजयत ।)
धातुसाधित-विशेषण-तालिकां पूरयत ।
धातुः | क्त | क्तवतु | कृत्याः | शतृ / शानच् |
मुच्-मुञ्च् (६ उ.प.) | ______ | ______ | मोचनीय: | मुञ्चन् |
धातुसाधित-विशेषण-तालिकां पूरयत ।
धातुः | क्त | क्तवतु | कृत्याः | शसेव्यःतृ / शानच् |
सेव् (१ आ. प.) | सेवितः | सेवितवान् | ______ | ______ |
उचितं पर्यायं चित्वा वाक्यं पुनर्लिखत ।
______ अवगतम् ।
समासविग्रहं कुरुत
समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
निद्रामग्नः | ______ | ______ |
समासविग्रहं कुरुत
समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
सर्वधर्माः | ______ | ______ |
क्रियापद-तालिकां पूरयत।
एकवचनम् | द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
पुरुषः | लकारः |
______ | स्तम् | ______ | मध्यमः | लोट् |
सङ्ख्याः अङ्कैः लिखत ।
षण्णवतिः - ______
सङ्ख्याः अङ्कैः लिखत।
चतुरशीतिः - ______
सङ्ख्याः अक्षरैः लिखत -
६ - ______
सङ्ख्याः अक्षरैः लिखत -
९३ - ______
सङ्ख्याः अक्षरैः लिखत -
२२ - ______
सङ्ख्याः अक्षरैः लिखत -
६२ - ______
लकारं लिखत ।
सः मृगं बन्धनात् व्यमुचत् ।
मञ्जूषातः क्रियापदानि धातुसाधित-विशेषणानि च पृथवकुरुत।
क्रियापदम् | धातुसाधित -विशेषणम् |
______ | ______ |
(मञ्जूषा - अकथयत्, मुक्तः, जानाति, भेतव्यम्, वहतु)
योग्यं पर्यायं चिनुत।
वानराः ______ फलानि खादन्ति।
समासविग्रहं कुरुत।
समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
अल्पधी: | ______ | ______ |
सङ्ख्या: अङ्कैः लिखत।
एकोनसप्ततिः -
मञ्जूषात: क्रियापदानि धातुसाधित-विशेषणानि च पृथक्कुरुत।
क्रियापदम् | धातुसाधित विशेषणम् |
______ | ______ |
(मञ्जूषा - आनयति, हत:, अगच्छत्, कर्तव्यम्, भवेत्)