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प्रश्न
निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।
महीं सकल अनरथ कर मूला। सो सुनि समुझि सहिउँ सब सूला॥ |
उत्तर
- प्रसंग - 2 अंक
- व्याख्या - 2 अंक
- विशेष + भाषा - 2 अंक
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पुलकि सरीर सभाँ भए ठाढ़े।
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कहब मोर मुनिनाथ निबाहा।
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निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए -
पुलकि सरीर सभाँ भए ठाढ़े। नीरज नयन नेह जल बाढ़े॥ कहब मोर मुनिनाथ निबाहा। एहि तें अधिक कहौं मैं काहा॥ मैं जानउँ निज नाथ सुभाऊ। अपराधिहु पर कोह न काऊ॥ मो पर कृपा सनेहू बिसेखी। खेलत खुनिस न कबहूँ देखी॥ |
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