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प्रश्न
निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए -
पुलकि सरीर सभाँ भए ठाढ़े। नीरज नयन नेह जल बाढ़े॥ कहब मोर मुनिनाथ निबाहा। एहि तें अधिक कहौं मैं काहा॥ मैं जानउँ निज नाथ सुभाऊ। अपराधिहु पर कोह न काऊ॥ मो पर कृपा सनेहू बिसेखी। खेलत खुनिस न कबहूँ देखी॥ |
उत्तर
अपने प्रभु श्री राम के विषय में बोलते समय उनका शरीर पुलक से भर जाता है और नेत्र अश्रु पूरित हो उठते है। वह श्री राम के स्वभाव की चर्चा करते हुए कहते है कि उनका हृदय कोमल और निर्मल है। उनके व्यक्तित्व की विशेषताएँ बताते हैं कि वे अपराधी पर भी क्रोध नहीं करते।
Notes
- संदर्भ - 1 अंक
- प्रसंग - 1 अंक
- व्याख्या - 3 अंक
- विशेष - 1 अंक
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निम्नलिखित पंक्तियों में निहित काव्य सौंदर्य लिखिए।
पुलकि सरीर सभाँ भए ठाढ़े।
नीरज नयन नेह जल बाढ़े॥
कहब मोर मुनिनाथ निबाहा।
एहि ते अधिक कहौं मैं काहा॥
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निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।
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