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प्रश्न
वियोगावस्था में सुख देने वाली वस्तुएँ भी दुख देने लगती हैं। 'गीतावली' से संकलित पदों के आधार पर सिद्ध कीजिए।
उत्तर
सुखकाल में सुखदायी प्रतीत होने वाली वस्तुएँ भी वियोगावस्था में दुख का कारण बन जाती हैं। इसका कारण यह है कि हम उन चीजों को देखकर उनसे जुड़ी सुखद स्मृतियों में खो जाते हैं। उनसे जुड़े व्यक्तियों का स्मरण हो जाता है। यह बात शृंगार तथा वात्सल्य दोनों अवस्थाओं में उत्पन्न होती है। माता कौशल्या भी अपने पुत्र राम से संबंधित वस्तुओं को देखकर भाव विह्वल हो जाती हैं। वह राम के शीघ्र लौटने की कामना करने लगती हैं।
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पुलकि सरीर सभाँ भए ठाढ़े।
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महीं सकल अनरथ कर मूला। सो सुनि समुझि सहिउँ सब सूला॥ |
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पुलकि सरीर सभाँ भए ठाढ़े। नीरज नयन नेह जल बाढ़े॥ कहब मोर मुनिनाथ निबाहा। एहि तें अधिक कहौं मैं काहा॥ मैं जानउँ निज नाथ सुभाऊ। अपराधिहु पर कोह न काऊ॥ मो पर कृपा सनेहू बिसेखी। खेलत खुनिस न कबहूँ देखी॥ |
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