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'नाम' क्यों बड़ा है? लेखक के विचार अपने शब्दों में लिखिए। - Hindi (Elective)

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Question

'नाम' क्यों बड़ा है? लेखक के विचार अपने शब्दों में लिखिए।

Answer in Brief

Solution

नाम का जीवन में बहुत महत्व है। नाम है, जो मनुष्य की पहचान है। यदि हमें किसी के रूप, आकार आदि का वर्णन किया जाएगा, तो नाम नहीं होने के कारण हम उसे भली प्रकार से पहचान नहीं पाएँगे। मनुष्य को उसके चेहरे-मोहरे से पहचान भी लिया जाए लेकिन जब तक नाम याद न आए मनुष्य की पहचान अधूरी लगती है। समाज में लोग हमें इसी नाम से जानते हैं। यह समाज द्वारा स्वीकृत नाम है। अतः मनुष्य कितना सुंदर ही क्यों न यदि उसका नाम नहीं है, तो उससे पहचानने में बहुत कठिनाई होगी। नाम मनुष्य की पहचान बन गया है। गौर करें, तो हर प्राणी तथा वस्तु के लिए एक नाम दिया गया है। यह नाम इसलिए दिया गया है कि उसे पहचानना सरल हो। उसका रूप, रंग, आकार, गुण, दोष, जाति, धर्म इत्यादि के आधार पर नाम दिया जाता है। इसी पता चलता है कि नाम बहुत बड़ा है।
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कुटज
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Chapter 2.1: हजारी प्रसाद द्विवेदी (कुटज) - प्रश्न-अभ्यास [Page 168]

APPEARS IN

NCERT Hindi - Antara Class 12
Chapter 2.1 हजारी प्रसाद द्विवेदी (कुटज)
प्रश्न-अभ्यास | Q 2. | Page 168

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निम्नलिखित गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
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निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
'रूप व्यक्ति-सत्य है, नाम समाज-सत्य। नाम उस पद को कहते हैं जिस पर समाज की मुहर लगी होती है। आधुनिक शिक्षित लोग जिसे 'सोशल सैक्शन' कहा करते हैं। मेरा मन नाम के लिए व्याकुल है, समाज द्वारा स्वीकृत, इतिहास द्वारा प्रमाणित, समष्टि-मानव की चित्त-गंगा में स्नात!'


निम्नलिखित गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
'रूप की तो बात ही क्या है! बलिहारी है इस मादक शोभा की। चारों ओर कुपित यमराज के दारुण निःश्वास के समान धधकती लू में यह हरा भी है और भरा भी है, दुर्जन के चित्त से भी अधिक कठोर पाषाण की कारा में रुद्ध अज्ञात जलस्रोत से बरबस रस खींचकर सरस बना हुआ है।' 


निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
हृदयेनापराजितः! कितना विशाल वह हृदय होगा जो सुख से, दुख से, प्रिय से, अप्रिय से विचलति न होता होगा! कुटज को देखकर रोमांच हो आता है। कहाँ से मिलती है यह अकुतोभया वृत्ति, अपराजित स्वभाव, अविचल जीवन दृष्टि!'


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