English

निम्नलिखित गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए- 'रूप की तो बात ही क्या है! बलिहारी है इस मादक शोभा की - Hindi (Elective)

Advertisements
Advertisements

Question

निम्नलिखित गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
'रूप की तो बात ही क्या है! बलिहारी है इस मादक शोभा की। चारों ओर कुपित यमराज के दारुण निःश्वास के समान धधकती लू में यह हरा भी है और भरा भी है, दुर्जन के चित्त से भी अधिक कठोर पाषाण की कारा में रुद्ध अज्ञात जलस्रोत से बरबस रस खींचकर सरस बना हुआ है।' 

Answer in Brief

Solution

  1. प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ हजारी प्रसाद द्वविवेदी द्वारा रचित निबंध कुटज से लिया गया है। लेखक इन पंक्तियों में कुटज की विशेषता बताते हैं।
  2. व्याख्या- लेखक प्रस्तुत पंक्तियों में कुटज की शोभा की बात करते हैं। वह कहते हैं कि कुटज देखने में बहुत सुंदर होता है। इसकी शोभा इतनी प्यारी होती है कि उसकी बलाएँ लेने का मन करता है। यदि वातावरण पर दृष्टि डालें तो चारों ओर भयंकर गर्मी पड़ रही है। ऐसा लगता है मानो यमराज साँस ले रहे हों। इतनी प्रचंड गर्मी होने के बाद भी यह झुलसाया नहीं है। इसमें हरियाली छायी हुई है। इसके साथ-साथ यह फल भी रहा है। यह ऐसे पत्थरों के बीच में से भी अपनी जड़ों के लिए रास्ता बनाता है और उनमें विद्यमान ऐसे जलस्रोतों को खोज लाता है, जिसके बारे में किसी को नहीं पता होता। लेखक ने पत्थरों की तुलना दुर्जन व्यक्तियों से की है। अतः वह कहता है कि कुटज अपने जीवन के लिए विकट परिस्थितियों से लड़ता भी है और सिर उठाकर खड़ा भी रहता है। 
shaalaa.com
कुटज
  Is there an error in this question or solution?
Chapter 2.1: हजारी प्रसाद द्विवेदी (कुटज) - प्रश्न-अभ्यास [Page 168]

APPEARS IN

NCERT Hindi - Antara Class 12
Chapter 2.1 हजारी प्रसाद द्विवेदी (कुटज)
प्रश्न-अभ्यास | Q 10. (ग) | Page 168

RELATED QUESTIONS

'नाम' क्यों बड़ा है? लेखक के विचार अपने शब्दों में लिखिए।


'कुट', 'कुटज' और 'कुटनी' शब्दों का विश्लेषण कर उनमें आपसी संबंध स्थापित कीजिए।


कुटज किस प्रकार अपनी अपराजेय जीवनी-शक्ति की घोषणा करता है?


'कुटज' हम सभी को क्या उपदेश देता है? टिप्पणी कीजिए।


कुटज के जीवन से हमें क्या सीख मिलती है?


कुटज क्या केवल जी रहा है- लेखक ने यह प्रश्न उठाकर किन मानवीय कमज़ोरियों पर टिप्पणी की है?


लेखक क्यों मानता है कि स्वार्थ से भी बढ़कर जिजीविषा से भी प्रचंड कोई न कोई शक्ति अवश्य है? उदाहरण सहित उत्तर दीजिए।

'कुटज' पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए कि 'दुख और सुख तो मन के विकल्प हैं।'

निम्नलिखित गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
'कभी-कभी जो लोग ऊपर से बेहया दिखते हैं, उनकी जड़ें काफ़ी गहरी पैठी रहती हैं। ये भी पाषाण की छाती फाड़कर न जाने किस अतर गह्वर से अपना भोग्य खींच लाते हैं।'


निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
'रूप व्यक्ति-सत्य है, नाम समाज-सत्य। नाम उस पद को कहते हैं जिस पर समाज की मुहर लगी होती है। आधुनिक शिक्षित लोग जिसे 'सोशल सैक्शन' कहा करते हैं। मेरा मन नाम के लिए व्याकुल है, समाज द्वारा स्वीकृत, इतिहास द्वारा प्रमाणित, समष्टि-मानव की चित्त-गंगा में स्नात!'


निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
हृदयेनापराजितः! कितना विशाल वह हृदय होगा जो सुख से, दुख से, प्रिय से, अप्रिय से विचलति न होता होगा! कुटज को देखकर रोमांच हो आता है। कहाँ से मिलती है यह अकुतोभया वृत्ति, अपराजित स्वभाव, अविचल जीवन दृष्टि!'


कुटज को 'गाढ़े का साथी' क्यों कहा गया है?


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×