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निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए- हृदयेनापराजितः! कितना विशाल वह हृदय होगा जो सुख से, दुख से, प्रिय से, अप्रिय से विचलति न होता होगा! - Hindi (Elective)

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Question

निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
हृदयेनापराजितः! कितना विशाल वह हृदय होगा जो सुख से, दुख से, प्रिय से, अप्रिय से विचलति न होता होगा! कुटज को देखकर रोमांच हो आता है। कहाँ से मिलती है यह अकुतोभया वृत्ति, अपराजित स्वभाव, अविचल जीवन दृष्टि!'

Answer in Brief

Solution

प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ हजारी प्रसाद द्वविवेदी द्वारा रचित निबंध कुटज से लिया गया है। लेखक इन पंक्तियों में कुटज की विशेषता बताते हैं।
व्याख्या- प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक कुटज की विशेषता बताता है। यह कैसा हृदय है, जो कभी पराजय नहीं होता। वह सुख-दुख, प्रिय-अप्रिय भावों की स्थिति में भी समान भाव से रहता है। अर्थात उसका इन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। उनका हृदय यदि इस गुण से व्याप्त है, तो वह बहुत ही विशाल है। वह दृढ़ होकर खड़ा रहता है। ऐसे उसे कुटज को देखकर लगता है। उसे देखते ही वह रोमांच भाव से भर जाता है। वह विकट परिस्थितियों में भी सिर उठाकर खड़ा है। उसकी स्थिति देखकर पता चलता है कि वह प्रसन्न है। यह उसके हरे-भरे रूप को देखकर ज्ञात हो जाता है। लेखक को उसके निडर, कभी न हारने वाले स्वभाव तथा अविचल स्वभाव से झलकता है। वह विशाल जीवन दृष्टि लिए हुए है, जो उसे कभी हारने नहीं देती।

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कुटज
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Chapter 2.1: हजारी प्रसाद द्विवेदी (कुटज) - प्रश्न-अभ्यास [Page 168]

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NCERT Hindi - Antara Class 12
Chapter 2.1 हजारी प्रसाद द्विवेदी (कुटज)
प्रश्न-अभ्यास | Q 10. (घ) | Page 168

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'नाम' क्यों बड़ा है? लेखक के विचार अपने शब्दों में लिखिए।


'कुट', 'कुटज' और 'कुटनी' शब्दों का विश्लेषण कर उनमें आपसी संबंध स्थापित कीजिए।


कुटज किस प्रकार अपनी अपराजेय जीवनी-शक्ति की घोषणा करता है?


'कुटज' हम सभी को क्या उपदेश देता है? टिप्पणी कीजिए।


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कुटज क्या केवल जी रहा है- लेखक ने यह प्रश्न उठाकर किन मानवीय कमज़ोरियों पर टिप्पणी की है?


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'कुटज' पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए कि 'दुख और सुख तो मन के विकल्प हैं।'

निम्नलिखित गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
'कभी-कभी जो लोग ऊपर से बेहया दिखते हैं, उनकी जड़ें काफ़ी गहरी पैठी रहती हैं। ये भी पाषाण की छाती फाड़कर न जाने किस अतर गह्वर से अपना भोग्य खींच लाते हैं।'


निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
'रूप व्यक्ति-सत्य है, नाम समाज-सत्य। नाम उस पद को कहते हैं जिस पर समाज की मुहर लगी होती है। आधुनिक शिक्षित लोग जिसे 'सोशल सैक्शन' कहा करते हैं। मेरा मन नाम के लिए व्याकुल है, समाज द्वारा स्वीकृत, इतिहास द्वारा प्रमाणित, समष्टि-मानव की चित्त-गंगा में स्नात!'


निम्नलिखित गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
'रूप की तो बात ही क्या है! बलिहारी है इस मादक शोभा की। चारों ओर कुपित यमराज के दारुण निःश्वास के समान धधकती लू में यह हरा भी है और भरा भी है, दुर्जन के चित्त से भी अधिक कठोर पाषाण की कारा में रुद्ध अज्ञात जलस्रोत से बरबस रस खींचकर सरस बना हुआ है।' 


कुटज को 'गाढ़े का साथी' क्यों कहा गया है?


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