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Question
निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
'रूप व्यक्ति-सत्य है, नाम समाज-सत्य। नाम उस पद को कहते हैं जिस पर समाज की मुहर लगी होती है। आधुनिक शिक्षित लोग जिसे 'सोशल सैक्शन' कहा करते हैं। मेरा मन नाम के लिए व्याकुल है, समाज द्वारा स्वीकृत, इतिहास द्वारा प्रमाणित, समष्टि-मानव की चित्त-गंगा में स्नात!'
Solution
- प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ हजारी प्रसाद द्वविवेदी द्वारा रचित निबंध कुटज से लिया गया है। लेखक इन पंक्तियों में नाम की विशेषता बताते हैं।
- व्याख्या- लेखक इन पंक्तियों में नाम की विशेषता बताता है। लेखक कहता है कि यह सत्य है कि मनुष्य अपने 'रूप' से पहचाना जाता है। जैसा उसका रूप होता है, वैसी उसकी पहचान होती है। यह व्यक्ति द्वारा दिया गया है और यह एक सच है। इसे झुठलाया नहीं जा सकता है। ऐसे ही 'नाम' है। 'नाम' समाज में हमारी पहचान होती है। इससे ही हमें जाना जाता है। समाज द्वारा इसे स्वीकृति मिली होती है। आधुनिक भाषा में इसे 'सोशल सैक्शन' कहते हैं। इसका अर्थ है कि आपका नाम समाज द्वारा स्वीकार किया गया है। लेखक कहता है कि मेरा मन नाम का अर्थ ढूँढने के लिए परेशान हो रहा है। अर्थात इसे समाज द्वारा कब स्वीकारा गया, इसे इतिहास के माध्यम से कैसे सही साबित किया गया होगा कि यह लोगों के ह्दय में जगह पा गया।
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